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शनिवार, 15 नवंबर, 2008 को 16:32 GMT तक के समाचार

'थोड़ी प्रगति हुई, बहुत बाक़ी है'

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि जी-20 में आर्थिक मंदी को लेकर हुई प्रगति से वे संतुष्ट हैं.

दुनिया के बीस प्रमुख विकसित और विकासशील देशों के संगठन जी-20 की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने आगाह किया कि 'संरक्षणवाद' समस्या का समाधान नहीं है.

उन्होंने कहा, "ऐसी परिस्थितियों में इस बात का ख़तरा रहता है कि सरकारें संरक्षणवादी नीतियाँ अपनाने लगती हैं." उन्होंने कहा कि खुले बाज़ार और व्यापार की नीति ही जारी रहनी चाहिए.

अगले दो महीने के लिए अमरीका के राष्ट्रपति रहने वाले जॉर्ज बुश ने कहा कि नेताओं ने 'बेबाक' तरीक़े से बातचीत की और प्रगति भी हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.

ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था में 'साफ़-सफ़ाई' की ज़रूरत है, उन्होंने ज़ोर दिया कि इस बैठक में जो उपाय सुझाए गए हैं उन पर जल्द से जल्द अमल किया जाना चाहिए.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित इस बैठक में दुनिया के 20 शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं.

मनमोहन सिंह की आर्थिक मामलों की विशेषज्ञता की वजह से उनकी सलाहों को काफ़ी अहमियत दी जा रही है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस बैठक में हिस्सा ले रहे नेताओं में थोड़े मतभेद भी हैं, अमरीका और कुछ अन्य देश हल्के-फुल्के सुधारों के हामी हैं जबकि कई यूरोपीय देश कड़े नियमों की वकालत कर रहे हैं.

ब्रितानी विदेश मंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि नेताओं को कई मुश्किल मुद्दों पर सहमति बनानी है, उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द यह समय सीमा तय करने की ज़रूरत है ताकि बैंकों को क्रेडिट उपलब्ध हो और वे लोगों को उधार दे सकें.

जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा कि "दुनिया के सभी देश इस समस्या से प्रभावित हैं और उनके भीतर इसे सुलझाने की इच्छाशक्ति भी दिख रही है जो बहुत ही आशाजनक बात है. लोग चाहते हैं कि ऐसा संकट दोबारा पैदा न हो".

इस बैठक के बाद जी-20 के नेता अगले वर्ष मार्च में दोबारा बैठक करके स्थिति की समीक्षा करेंगे, तब तक नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ओबामा कार्यभार संभाल चुके होंगे.

वाशिंगटन में हो रही मौजूदा बैठक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है.

जी-20 में अमरीका और विकसित यूरोपीय देशों के अलावा भारत, चीन और ब्राज़ील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएँ भी हैं.

इस संगठन के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएँ सारी वैश्विक अर्थव्यवस्था का 85 प्रतिशत हिस्सा है.