शनिवार, 15 नवंबर, 2008 को 02:53 GMT तक के समाचार
अमीर देशों में आर्थिक मंदी बढ़ने की ख़बरों के बीच दुनिया भर के नेता वॉशिंगटन में अर्थव्यवस्था पर हो रहे पहले आर्थिक सम्मेलन के लिए एकत्रित हुए हैं.
इसमें विकसित और विकासशील देशों के नेता हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने यह सम्मेलन इसलिए बुलाया है ताकि दुनिया भर में आर्थिक संकट को और गहराने से रोकने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर सहमति बन सके.
बीबीसी के आर्थिक संवाददाता का कहना है कि इस सम्मेलन ने यह साफ़ संकेत दे दिए हैं कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर अब जी-8 देशों का वर्चस्व नहीं रहा और चीन-ब्राज़ील जैसे देशों का महत्व भी पर्याप्त है.
एजेंडा और आशंका
जहाँ तक इस सम्मेलन की सफलता का सवाल है तो कुछ ही लोगों को लगता है कि इससे कोई दीर्घकालिक समाधान निकल सकता है क्योंकि इस सम्मेलन में अमरीका के नवनिर्वाचित और भावी राष्ट्रपति बराक ओबामा इसमें हिस्सा नहीं ले रहे हैं.
दूसरा इस सम्मेलन से पहले यूरोप और दूसरे देशों के बीच एक मतभेद भी उभर आया है.
एक तरफ़ यूरोप चाहता है कि बाज़ार में सख़्त नियम-क़ानून लाए जाएँ जबकि अमरीका और दूसरे देश अभी भी उदारता के पक्षधर हैं.
शुक्रवार को व्हाइट हाउस में रात्रिभोज के बाद दुनिया भर के नेता शनिवार को एकत्रित होकर पाँच घंटे दुनिया के आर्थिक संकट पर चर्चा करेंगे.
और सम्मेलन के अंत में जॉर्ज बुश की ओर से एक वक्तव्य जारी किया जाएगा.
माना जा रहा है कि सभी देश कम से कम इस बात पर एकमत हो जाएंगे कि आर्थिक सुधारों के लिए साझा सिद्धांत विकसित किया जाए और विश्व स्तर पर अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने वाली संस्थाओं में परिवर्तन होना चाहिए.
इसके बाद दुनिया के नेता उन सुधारों पर बात करेंगे जिसे वे अर्थव्यवस्था को तंदरुस्त रखने के लिए आवश्यक मानते हैं.
इससे पहले राष्ट्रपति जॉर्ज बुश साफ़ कर चुके हैं कि वे नहीं मानते कि इस आर्थिक संकट का कारण खुला बाज़ार और पूंजीवाद है.
उनका मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए किसी नई व्यवस्था की ज़रुरत नहीं है बल्कि इस व्यवस्था में सुधार की ज़रुरत है.