गुरुवार, 13 नवंबर, 2008 को 18:15 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने वित्तीय प्रणाली में सुधार की ज़रुरत को स्वीकार किया है लेकिन साथ ही कहा कि वैश्विक संकट का कारण मुक्त व्यापार नहीं है.
वैश्विक आर्थिक संकट पर अमरीका में आयोजित होने वाले सम्मेलन से पहले राष्ट्रपति बुश ने दुनिया भर के नेताओं से अपील की है कि मुक्त बाजा़र को मानते हुए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं का आधुनिकीकरण किया जाए और नियामक प्रणाली को बदला जाए.
उनका कहना था कि वित्तीय बाज़ार में नए नियम और पारदर्शिता की ज़रुरत है लेकिन मुक्त व्यापार पर रोक नहीं लगनी चाहिए.
अपने भाषण में बुश का कहना था कि लंबे समय में अच्छी विकास दर पाने का एक ही रास्ता है और वो है स्वतंत्र लोग और मुक्त व्यापार.
बुश का कहना था कि सरकारों की कार्रवाई से सबकुछ ठीक होने वाला नहीं है और इसके लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधारों की ज़रुरत है न कि इस व्यवस्था को पूर्ण रुप से बदलने की.
उनका कहना था कि दुनिया में पैसों की सख्त कमी का कारण पूरी दुनिया में लेनदार, देनदार, सरकारी और स्वतंत्र नियामकों और वित्तीय फर्मों का किसी न किसी स्तर पर असफल होना है.
हालांकि उन्होंने कहा कि इसे ठीक करने के लिए पूरे सिस्टम को बदलने की ज़रुरत नहीं है बल्कि नियमों में सुधार की आवश्यकता है.
राष्ट्रपति ने माना कि पूंजीवाद बिल्कुल परफेक्ट सिस्टम नहीं है लेकिन अर्थव्यवस्था के लिए अबतक की सबसे बेहतरीन और अच्छी प्रणाली के रुप में उभर कर सामने आई है.
बुश का कहना था कि ये सही नहीं होगा कि कुछ महीनों के संकट के कारण पिछले 60 वर्षों में जो सफलता मिली है उसे ख़ारिज़ कर दिया जाए.
उल्लेखनीय है कि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ( ओईसीडी) ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि आने वाले दिनों में दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमरीका, जापान और यूरोप की विकास दर घटेगी.
ओईसीडी के पूर्वानुमान में कितनी सच्चाई है इसका अंदाज़ा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी आधिकारिक रुप से मंदी में जा चुकी है.
ब्रिटेन में पिछले दस सालों में बेरोज़गारी की दर सबसे ऊंची है और ब्रिटेन की सबसे बड़ी फोन कंपनी बीटी ने दस हज़ार नौकरियों में कटौती की घोषणा की है. इसमें से चार हज़ार नौकरियां पहले ही ख़त्म की जा चुकी हैं.
वैश्विक आर्थिक संकट पर वाशिंगटन में एक महत्वपूर्ण सम्मेलन शनिवार से शुरु हो रहा है जिसकी अगुआई अमरीकी राष्ट्रपति करेंगे.