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बुधवार, 12 नवंबर, 2008 को 20:53 GMT तक के समाचार

'चुनौतियां और भी हैं अभी'

अमरीका के वित्त मामलों के मंत्री हेनरी पॉलसन का कहना है कि सात सौ अरब डॉलर के पैकेज से अमरीकी अर्थव्यवस्था को स्थिर कर पाने में मदद मिली है लेकिन आगे अभी और भी चुनौतियां हैं.

पॉलसन ने पहली बार माना है कि अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए दिए गए सात सौ अरब डॉलर के पैकेज का असर पड़ रहा है.

उनका कहना था कि इस पैकेज से मदद तो मिली है लेकिन फिलहाल बाज़ार स्थिर नहीं होने के कारण कई और चुनौतियां आ सकती हैं.

उनका कहना था कि अब इस पैकेज से उन परिसंपत्तियों को नहीं खरीदा जाएगा जो रिण नहीं चुका पाने के कारण नुकसान पहुंचा रही थीं. पॉलसन के अनुसार इस समय इस पैकेज से इन परिसंपत्तियों को खरीदना सही क़दम नहीं होगा.

उनका कहना था कि इस पैकेज के ज़रिए मुसीबत में फंसे बैंकों को धन मुहैया कराया जाएगा ताकि वो सामान्य कारोबार कर सकें और उधार देने में फिर सक्षम हो जाएं.

कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था के जो पैकेज दिया है इसके तहत पहले बैंकों के ख़राब हो चुके रिणों को खरीदने की योजना थी लेकिन अब इस पैकेज के पैसे से शेयर खरीदे जाएंगे ताकि कंपनियों की बैलेंस शीट ठीक हो सके.

हालांकि पॉलसन का कहना था कि इस तथ्य पर नज़र रखी जा रही है कि आने वाले दिनों में बैंकों के ख़राब हो चुके रिणों को खरीदना अर्थव्यवस्था के लिए ठीक होगा या नहीं.

हालांकि वित्त मंत्री के इन बयानों के बावजूद वाल स्ट्रीट का माहौल बेहतर नहीं हुआ और डाउ जोंस इंडेक्स दोपहर में 3.2 प्रतिशत गिर गया.

पॉलसन के इस बयान से साफ़ है कि वो इस पैकेज को अमरीकी कार कंपनियों की मदद में भी नहीं लगाने वाले हैं. कार बनाने वाली कुछ अमरीकी कंपनियां दिवालिएपन के कगार पर बताई जा रही हैं.

पॉलसन के इस बयान से प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट स्पीकर नैंसी पेलोसी को निराशा हो सकती है क्योंकि उन्होंने मांग की थी कि सरकार इस पैकेज के ज़रिए कार कंपनी जनरल मोर्टर्स, फोर्ड और क्रिसलर की मदद करे.

उल्लेखनीय है कि आर्थिक मंदी का सबसे अधिक असर अमरीका के कार उद्योग पर पड़ा है और लगभग सभी अमरीकी कार कंपनियां घाटे में जा रही हैं.