शनिवार, 01 नवंबर, 2008 को 09:23 GMT तक के समाचार
भारतीय रिज़र्व बैंक ने शनिवार को अचानक कम अवधि की ब्याज दर में 0.5 प्रतिशत की कटौती और कैश-रिज़र्व-रेश्यो में एक प्रतिशत की कटौती की है.
पश्चिमी देशों में वित्तीय संकट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर हो रहे असर के कारण रिज़र्व बैंक ने बाज़ार में अतिरिक्त पैसा लगाने के मकसद में ये कदम उठाया है.
ग़ौरतलब है कि लगभग एक हफ़्ता पहले जब पूरी नीति पर पुनर्विचार के बाद भारत के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया था.
अतिरिक्त 400 अरब रुपए उपलब्ध
कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि एक हफ़्ते के भीतर भारत सरकार के नीति निर्धारण करने वालों को ऐसा लगा है कि बाज़ार में पैसे की कमी अनुमान से ज़्यादा हो गई है.
रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में 50 अंकों की कटौती की है जिससे ये आठ प्रतिशत से घटकर 7.5 प्रतिशत हो गई है. सीआरआर को 100 अंक घटाया गया है और यह 6.5 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत हो गई है.
जब रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है तो उस पर जिस दर से ब्याज लिया जाता है उसे रेपो दर कहते हैं. विभिन्न वाणिज्यिक बैंक अपना पैसा रिज़र्व बैंक के ख़जाने में जमा करते हैं और इस पर रिज़र्व बैंक जो ब्याज़ देता है उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं.
समाचार एजेंसियों के अनुसार इससे अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त 400 अरब रुपए उपलब्ध होंगे.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि इससे निवेश को बढ़ावा मिल सकता है और विकास की दर स्थाई रखी जा सकती है.