गुरुवार, 30 अक्तूबर, 2008 को 17:48 GMT तक के समाचार
भारत में महंगाई की दर में लगातार पाँचवें हफ़्ते गिरावट आई है. चार महीने में पहली बार महंगाई की दर 11 फ़ीसदी से नीचे आ गई है.
18 अक्तूबर को समाप्त हुए सप्ताह में महंगाई की दर 10.68 फ़ीसदी रह गई.
तेल की क़ीमतों में कमी, निर्माण सामग्रियों की क़ीमतों में गिरावट और आर्थिक विकास की दर बनाए रखने के लिए सीआरआर और रेपो दरों में कमी की संभावनाओं को देखते हुए यह कमी आई है.
वित्त मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा है कि 30 आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतें पिछले सप्ताह के 7.80 प्रतिशत की तुलना में 7.47 प्रतिशत रह गई हैं.
मंत्रालय का कहना है कि छह आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतों में तो कमी आई है लेकिन अन्य 16 वस्तुओं की क़ीमतें यथावत बनी हुई हैं.
इस बीच दालों, फलों और गेंहूँ की क़ीमतों में कमी आई है हालांकि सब्ज़ी की क़ीमतें 2.3 प्रतिशत बढ़ी है और मसालों की क़ीमतें आधा प्रतिशत बढ़ी हैं.
थोक मूल्यों पर आधारित महंगाई की दर में एक हफ़्ते में 0.39 प्रतिशत की कमी आई है और यह दर 10.68 तक जा पहुँची है.
एक साल पहले इसी समय महंगाई की दर 3.11 प्रतिशत थी.
विशेषज्ञों का कहना है कि इन अनुमानों का बाज़ार पर सकारात्मक असर हुआ है कि आर्थिक विकास की दर बरकरार रखने के लिए रिज़र्व बैंक सीआरआर और रेपो दरों में कमी करने जा रहा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी के हवाले से कहा है कि बाज़ार में पूँजी की कमी को देखते हुए रिज़र्व बैंक सीआरआर की दर में एक से डेढ़ प्रतिशत की कटौती कर सकता है.
उल्लेखनीय है कि जून में जब भारत सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों और एलपीजी की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी की घोषणा की थी तो महंगाई की दर 8.7 प्रतिशत से बढ़कर दो अंकों तक पहुँच गई थी और अगस्त के शुरु में 13 प्रतिशत के क़रीब पहुँच गई थी. जो 16 वर्षों में सबसे अधिक थी.
भारत अपनी ज़रुरतों का लगभग 70 फ़ीसदी तेल आयात करता है और इसकी क़ीमतें घरेलू महँगाई दर के निर्धारण में अहम भूमिका अदा करती हैं.