गुरुवार, 23 अक्तूबर, 2008 को 00:11 GMT तक के समाचार
यूरोप और एशिया में गिरावट के बाद अमरीकी शेयर बाज़ारों में भी बुधवार को भारी गिरावट देखी गई.
माना जा रहा है कि मंदी के डर से निवेशकों का भरोसा हिल गया है.
वाल स्ट्रीट के डॉउ जोंस में 514 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. जबकि ब्रिटेन और जर्मनी के शेयर बाज़ार 4.5 फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए.
दूसरी ओर याहू और मर्क जैसी कंपनियों में नौकरियों में कटौती ने आर्थिक चिंताओं को बढ़ा दिया है.
इधर बुश प्रशासन की ओर से घोषणा की गई है कि दुनिया के वित्तीय संकट पर चर्चा करने के लिए अगले महीने शिखर सम्मेलन बुलाया जाएगा.
इस सम्मेलन में वित्तीय संकट से निपटने के उपायों पर चर्चा होगी. इसमें जी-20 और विकासशील देशों के नेता हिस्सा लेंगे.
ग़ौरतलब है कि इस वित्तीय संकट को टालने के लिए बुश प्रशासन 700 अरब डॉलर का वित्तीय पैकेज लेकर आया था.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने ये कहकर चिंता बढ़ा दी है कि अमरीका सरकार वित्तीय संकट से उबारने के लिए जो पैकेज दे रही है, उससे बात बनेगी नहीं.
भारत में गिरावट
भारत में भी बुधवार को शेयर बाज़ार अच्छी खासी गिरावट के साथ बंद हुए.
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 513 अंक नीचे 10170 पर बंद हुआ.
पूरे दिन सेंसेक्स में भारी उतार चढ़ाव देखा गया. ये 10485 के उच्चतम 10128 के स्तर तक गया.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 170 अंक नीचे 3065 पर बंद हुआ.
टाटा स्टील, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज, रिलायंस कम्युनिकेशंस, टाटा मोटर्स और जयप्रकाश एसोशिएटस जैसी कंपनियों को नुक़सान उठाना पड़ा.
उल्लेखनीय है कि दुनिया के अधिकतर शेयर बाज़ार इस साल की शुरुआत से लगभग 50 फ़ीसदी से ज्यादा गिर चुके हैं.