http://www.bbcchindi.com

गुरुवार, 16 अक्तूबर, 2008 को 12:52 GMT तक के समाचार

आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

अब रियल एस्टेट की नौकरियों की बारी!

भारत में विमानन क्षेत्र उद्योग की नौकरियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और विशेषज्ञों की माने तो इसके बाद रियल एस्टेट यानि अचल संपत्ति के क्षेत्र की नौकरियों पर गाज गिर सकती है.

अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था ज़बर्दस्त बूम के दौर से गुजर रही थी. भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र उससे कदमताल कर रहा था.

भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ यानि फ़िक्की के एक अध्ययन के अनुसार भारत में कृषि के बाद रियल एस्टेट दूसरा सबसे बड़ा नौकरियाँ प्रदान करनेवाला क्षेत्र है.

फ़िक्की का कहना है कि इस क्षेत्र का आकार 600 अरब रुपए के आसपास है और इसके साथ लगभग 250 अन्य छोटे- बड़े क्षेत्र जुड़े हुए हैं.

आर्थिक विशेषज्ञ डॉक्टर हरिवंश का कहना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र इसलिए संकट के दायरे में आ गया है क्योंकि इसमें विदेशी संस्थागत क्षेत्रों का निवेश था और उनकी हालत खस्ता है.

साथ ही मध्यम वर्ग इस वित्तीय संकट से प्रभावित हुआ है जिससे माँग में कमी आई है. इसकी वजह से नौकरियों के भी प्रभावित हो रही हैं.

उनका कहना था कि इस संकट की एक वजह ये भी है कि बिल्डर्स ने कृत्रिम माँग पैदा कर रखी थी और कारोबार का एक बड़ा हिस्सा सट्टेबाजी पर आधारित था.

कारोबार में मंदा

चंद्रलेखा कंस्ट्रक्शन के प्रमुख एचपी सिंह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि इस क्षेत्र में नौकरियाँ जानी शुरू हो गईं हैं.

वो कहते हैं कि जब ये क्षेत्र उछाल पर था तब वेतन में भारी वृद्धि हुई थी लेकिन कारोबार में मंदा है तो उसका असर नौकरियों पर भी दिखेगा.

आम्रपाली ग्रुप के चेयरमैन अनिल शर्मा ये तो स्वीकार करते हैं कि वित्तीय संकट का असर रियल एस्टेट कारोबार पर है लेकिन वो आशांवित हैं और कहते हैं कि माँग इतनी अधिक है कि इस क्षेत्र में पहले जैसी तेज़ी आ जाएगी.

उनका कहना था कि रिज़र्व बैंक ने कई क़दम उठाए हैं जिससे बाज़ार में पैसा आना शुरू हो गया है और पंजाब नेशनल बैंक जैसे संस्थानों ने गृह ऋण पर ब्याज दर घटा दी है.

अनिल शर्मा का मानना है कि इस वित्तीय संकट से छोटे बिल्डरों को परेशानी हो सकती है लेकिन बड़े बिल्डर इस संकट को पार कर जाएंगे और लोगों की नौकरियों भी बची रहेंगी.