बुधवार, 15 अक्तूबर, 2008 को 13:34 GMT तक के समाचार
वैश्विक स्तर पर चल रहे आर्थिक संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने बैंकों को 25 हज़ार करोड़ रुपयों का आर्थिक पैकेज देने की घोषणा की है.
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संकट से निपटने के लिए कई और क़दम उठाए जाने की घोषणा की है.
इसमें कॉरपोरेट बांड्स के लिए विदेशी संस्थागत निवेश की सीमा बढ़ाना और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (सीएआर) की सीमा बढ़ाना भी शामिल है.
वित्तमंत्री ने कहा है कि रिज़र्व बैंक (आरबीआई) इस सिलसिले में कुछ और घोषणाएँ करने वाली है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की है. इस बैठक में वित्तमंत्री के अलावा रिज़र्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव मौजूद थे.
पैकेज
वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि कृषि ऋण माफ़ी और ऋण राहत योजना के तहत सरकार ने वाणिज्यिक बैंकों, ग्रामीण बैंकों और सहकारी संस्थाओं को 25 हज़ार करोड़ रुपए का पैकेज देने की घोषणा की है.
उन्होंने बताया कि यह सहायता की पहली किस्त है और सरकार के अनुरोध पर आरबीआई ने तुरंत ही यह राशि देने की सहमति दी है.
वित्तमंत्री ने कहा कि इस राशि में से साढ़े सात हज़ार करोड़ रुपए की राशि वाणिज्यिक बैंकों को दी जाएगी जबकि 17 हज़ार करोड़ रुपए नाबार्ड को दिए जाएँगे और इसके लिए बैंकों को कोई गारंटी नहीं देनी पड़ेगी.
चिदंबरम ने कहा कि कॉरपोरेट बांड्स के लिए विदेशी संस्थागत निवेश के लिए सीमा तीन अरब डॉलर से बढ़ाकर छह अरब डॉलर कर दी गई है.
पर्याप्त पूँजी
वित्तमंत्री ने कहा कि भारत के बैंकों के पास पर्याप्त पूँजी है और किसी भी बैंक के पास कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (सीएआर) 10 प्रतिशत से कम नहीं है.
भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि बैंकों के लिए सीएआर की सीमा को 12 किसी सुविधाजनक तारीख़ से 12 प्रतिशत कर दिया जाएगा.
उनका कहना था कि इस योजना की घोषणा बाद में की जाएगी.
इसके अलावा रिज़र्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे ऋण लेने वालों और कार्यपूँजी लेने वालों के लिए पूंजी लेना आसान रखें.
इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को पूँजी के लेनदेन को आसान बनाने के लिए कई क़दम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.