http://www.bbcchindi.com

सोमवार, 13 अक्तूबर, 2008 को 01:58 GMT तक के समाचार

संकट पर चर्चा से एशियाई बाज़ार सुधरे

वित्तीय संकट से निबटने की कोशिशों का एशियाई बाज़ारों पर सकारात्मक रुख़ नज़र आ रहा है.

ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाज़ार में साढ़े पाँच फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई. पिछले सप्ताह ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट हुई थी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसमें ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रुड की घोषणाओं का भी योगदान है.

उन्होंने बैंक जमा पर तीन साल की गारंटी देने का ऐलान किया था.

दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई बाज़ार भी साढ़े तीन फ़ीसदी के ऊंचे स्तर पर खुले.

इधर यूरोपीय नेता भी संकट के समाधान के लिए जी-तोड़ कोशिश में जुटे हैं.

यूरोप के 15 देशों के नेताओं ने रविवार को पेरिस में एक लंबी बैठक की और देर रात घोषणा की कि उन्होंने एक योजना बनाई है जो संकट के सभी पहलुओं को छूती है.

यूरोप के 15 देशों के नेताओं ने रविवार को पेरिस में बैठक कर जिस साझा योजना पर सहमत होने की घोषणा की है उसके तहत बैंकों के बीच आपस में होनेवाले कर्ज़ों के लेन-देन को गारंटी दी जाएगी, साथ ही बीमार वित्तीय संस्थानों को बचाया जाएगा.

यूरोपीय प्रयास

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने इस साझा योजना पर सहमति की घोषणा करते हुए कहा कि यूरोपीय सरकारें संकट के हल के लिए अभूतपूर्व क़दम उठा रही हैं और आम नागरिकों को चाहिए कि वे ऐसे प्रयासों पर विश्वास रखें.

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी का कहना था,'' बैंकों को बाज़ार संचालकों को ये अवश्य समझना चाहिए कि चुनौती कितनी बड़ी है. हमें अपेक्षा है कि वे ज़िम्मेदारी दिखाएँ, कम-से-कम उसी तरह की गंभीरता दिखाएँ जैसा कि यूरोप के हम नेता दिखा रहे हैं, हमारी एकता पक्की है, इरादा पक्का है और मैं समस्त यूरोपवासियों से ये अनुरोध करता हूँ कि वे हममें विश्वास रखें."

वैसे पेरिस में जमा हुए नेताओं ने अभी ये नहीं कहा है कि इस योजना के तहत किया क्या जाएगा, बाज़ार की सेहत सुधारने के लिए कितना पैसा लगाया जाएगा.

सारकोज़ी ने कहा कि यूरोप की देशों की सरकारें इस योजना के अनुरूप आज अपने-अपने यहाँ अलग-अलग तरह की घोषणाएँ करेंगी.

समझा जा रहा है कि यूरोपीय देश ब्रिटेन की ही तरह बीमार बैंकों को बचाने के लिए राहत योजनाओं की घोषणा करेंगे.

ब्रिटेन की योजना

ब्रिटेन ने पिछले सप्ताह अरबों डॉलर वाली राहत योजना की घोषणा की थी जिसमें अंतरबैंकीय लेन-देन के लिए सरकार की गारंटी दिए जाने के अतिरिक्त डूबने के कगार पर पहुँचे बैंकों के कुछ हिस्सों को ख़रीदने जैसे उपाय शामिल थे.

ये बात ग़ौर करनेवाली है कि ब्रिटेन उन 15 यूरोपीय देशों के समूह का हिस्सा नहीं है जिसके नेता कल पेरिस में जुटे थे, लेकिन इसके बावजूद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन को पेरिस बुलाया गया था ताकि वे यूरोपीय नेताओं को ब्रिटिश योजना के बारे में बता सकें.

वैसे ब्रिटेन में सरकार ने बैंकों को सहारा देने की जिस योजना की घोषणा की है उसकी पूरी तस्वीर सोमवार को साफ़ हो सकती है.

समझा जा रहा है कि ब्रिटेन के पाँच में से चार बड़े बैंक सरकार से 60 अरब डॉलर तक की सहायता माँग सकते हैं.

ब्रिटेन में इसपर बहस भी हो रही है कि क्या आम करदाताओं का पैसा बैंकों को दिया जाना सही है.

जानकारों का कहना है कि अब सरकार चाहे जितनी भी सहायता कर ले, ब्रिटेन के कुछ पुराने और बड़े बैंकों की स्थिति अब पहले जैसी कभी नहीं रह पाएगी.

वो चाहें या ना चाहें, मगर सरकारी मदद के बाद आम करदाता अब जल्दी ही इन बैंकों के हिस्सेदार बन जाएँगे और ऐसे में इन बैंकों को कैसे चलाया जाए और किसे कर्ज़ दिया जाए या नहीं, ये केवल बैंक अधिकारियों के हाथ में ही नहीं रह जाएगा, आम लोगों की भी सुननी पड़ेगी.