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शनिवार, 11 अक्तूबर, 2008 को 00:10 GMT तक के समाचार

जी-7 देशों की पाँच सूत्रीय योजना

दुनिया के बड़े औद्योगिक देशों के समूह जी-7 के वित्तमंत्रियों ने मिलकर वैश्विक आर्थिक संकट से निपटने के लिए एक पाँच सूत्रीय योजना बनाई है.

वॉशिंगटन में हड़बड़ी में आयोजित की गई इस बैठक के बाद वित्तमंत्रियों ने एक संक्षिप्त बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में तत्काल और अभूतपूर्व क़दम उठाए जाने की ज़रुरत है.

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने अमरीकी नागरिकों को आश्वस्त किया था कि सरकार अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए 'आक्रामकता के साथ' काम कर रही है.

इस बीच ब्याज़ दर में कटौती और केंद्रीय बैंकों के भारी आर्थिक मदद के बावजूद बाज़ार में वैश्विक आर्थिक मंदी का डर पसरा हुआ था और शेयर बाज़ार का धराशाई होना जारी रहा.

एशियाई और यूरोपीय बाज़ार के बाद अमरीकी शेयर बाज़ार भी गिरावट के साथ खुला. हालांकि कुछ देर बाद बाज़ार संभलता हुआ दिखा.

मिलकर कार्रवाई

जी-7 देशों में अमरीका, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, फ़्रांस, इटली और कनाडा शामिल हैं.

इन देशों ने वादा किया है कि वे बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को डूबने से बचाएँगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वे सार्वजनिक और निजी स्रोतों से पूंजी जुटा सकें.

बैठक के बाद उन्होंने कहा कि वे 'ठोस निर्णय लेंगे और सभी उपलब्ध साधनों का' सहारा लेंगे.

हालांकि बीबीसी के आर्थिक संवाददाता का कहना है कि जी-7 के बयान में विवरणों की कमी है और अब ज़्यादातर चीज़ें इस पर निर्भर करेंगी कि इन देशों की सरकारें अपनी योजनाओं को किस तरह से आगे बढ़ाती हैं.

जी-7 की बैठक के बाद अमरीकी वित्तमंत्री हेनरी पॉलसन ने कहा है कि इस समूह का दृष्टिकोण इस मामले में साफ़ था कि क्या क़दम उठाने हैं.

उनका कहना था कि समूह अब मिलकर पूंजी बाज़ार को स्थिर करने का प्रयास करेगा.

उन्होंने कहा कि अमरीका चीन और जापान के साथ काम कर रहा है क्योंकि इन दोनों ही देशों में अमरीकी पूंजी का बड़ा निवेश है.

पॉलसन का कहना था कि अमरीकी सरकार अब संघर्ष कर रहे वित्तीय संस्थाओं में शेयर ख़रीदना शुरु करेगी.

बुश का आश्वासन

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अमरीकियों को आश्वस्त किया है कि सरकार अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए 'आक्रामकता के साथ' काम कर रही है.

व्हाइट हाउस के बाहर से दिए गए संबोधन में उन्होंने कहा कि बाज़ार में जो उठापटक का दौर चल रहा है उसके पीछे 'अनिश्चितता और डर' का माहौल है.

राष्ट्रपति बुश ने 700 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज की अपनी सरकार की योजना का बचाव करते हुए कहा कि यह राशि पर्याप्त है.

उन्होंने कहा कि इस आर्थिक पैकेज का असर दिखने में कुछ वक़्त लगेगा.

किसी नए उपाय की घोषणा किए बग़ैर उन्होंने कहा, "हम एक समृद्ध देश हैं और हमारे पास विविध तरह के उपाय और अथाह संसाधन हैं. हम इन उपायों का आक्रामकता के साथ उपयोग कर रहे हैं."

अपने निवेश और पेंशन एकाउंट को लेकर लोगों की चिंता का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "नागरिको, हम इस संकट को हल सकते हैं और हम ऐसा करेंगे."

उन्होंने कहा कि अमरीका दुनिया भर में अपने साथियों के साथ अफ़रा-तफ़री भरे बाज़ार को स्थिर करने की कोशिशों में लगा हुआ है.

बाज़ार में उठापटक जारी

दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में उठा-पटक का दौर जारी है. एशियाई और यूरोपीय बाज़ार के बाद अमरीकी शेयर बाज़ार भी गिरावट के साथ खुला लेकिन फ़िलहाल संभल गया है.

डाओ जोंस खुलते ही 10 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गया लेकिन फ़िलहाल बाज़ार संभल गया है. इससे पहले एशियाई शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई.

जापान का निकेई 20 वर्ष के सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुँच गया तो भारत का मुंबई शेयर बाज़ार भी 800 अंक से ज़्यादा गिरकर बंद हुआ.

यूरोपीय बाज़ारों की भी कमोबेश यही स्थिति रही. ब्रिटेन का एफ़टीएसई 8.9 प्रतिशत नीचे गिरकर बंद हुआ. फ़्रांसीसी शेयर बाज़ार 7.7 प्रतिशत और जर्मनी का शेयर बाज़ार 8.4 प्रतिशत नीचे गिरा.

इस सप्ताह टोक्यो शेयर बाज़ार में 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. अमरीका में कच्चे तेल की क़ीमत 83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है. यूरोपीय बाज़ार में भी तेल की क़ीमत में गिरावट आई है.

ज़रूरत से ज़्यादा अनिश्चितता के कारण मॉस्को और जकार्ता के शेयर बाज़ार में फ़िलहाल कारोबार रोक दिया गया है.