बुधवार, 08 अक्तूबर, 2008 को 07:48 GMT तक के समाचार
अमरीका में वित्तीय बाज़ार के संकट और दुनिया के बाज़ारों पर उसके असर से जुड़ी चिंताओं के कारण बुधवार को भारत समेत एशिया के कई शेयर बाज़ारों में ख़ासी गिरावट आई है.
ग़ौरतलब है कि एशियाई शेयर बाज़ारों में ये गिरावट का लगातार दूसरा दिन है. टोक्यो का निक्केई सूचकांक लगभग 10 प्रतिशत गिरकर, बंद होने से पहले कुछ संभला है. ये पाँच साल में निक्केई पर एक दिन में हुआ सबसे अधिक नुकसान है.
भारतीय शेयर बाज़ार में भी बुधवार को भारी बिक्री हुई बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक दोपहर से पहले एक बार लगभग 700 अंक गिरकर 11000 से भी नीचे जा पहुँचा.
उधर ब्रितानी सरकार ने घोषणा की है वह ब्रिटेन के बैंकों को इस वित्तीय संकट में मदद करने के लिए सरकारी ख़ज़ाने से 90 अरब डॉलर का पैकेज देगी.
लेकिन इस घोषणा के बाद भी यूरोपीय शेयर बुधवार को कारोबार शुरु होते ही कुछ गिरे है. लंदन में 1.5 प्रतिशत और पेरिस में 2.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है.
बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ के अनुसार इस क्षेत्र में केंद्रीय बैंकों के बाज़ार में अरबों डॉलर डालने और ब्याज दरों को घटाने के बावजूद हुआ है.
इससे स्पष्ट है कि निवेशकों में भरोसा नहीं बन पाया है कि बाज़ार अमरीकी वित्तीय संकट से बाहर निकल सकते हैं.
वॉल स्ट्रीट का असर
महत्वपूर्ण है कि निक्केई पर बिकवाली वॉल स्ट्रीट पर शेयरों की भारी बिक्री के बाद आई. डाओ जोंस लगभग 500 अंक गिरकर बंद हुआ.
अमरीकी शेयर बाज़ार का सूचकांक 11 हज़ार के नीचे बड़ी मुश्किल से जाता था लेकिन वह 500 अंक गिरकर 9500 के स्तर से कुछ नीचे बंद हुआ है.
जहाँ निक्कई 989 अंक गिरकर 9167 पर बंद हुआ, वहीं हॉंगकॉंग का हांगसेंग सूचकांक 5.5 प्रतिशत गिरा और ऑस्ट्रेलिया के मुख्य शेयर बाज़ार में पाँच प्रतिशत की गिरावट आई.
इंडोनेशिया के शेयर बाज़ार में दस प्रतिशत की गिरावट के बाद कारोबारप बंद कर दिया गया. सिंगापुर के शेयर बाज़ार में भी भारी गिरावट दर्ज हुई.