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रविवार, 05 अक्तूबर, 2008 को 11:53 GMT तक के समाचार

जर्मन बैंक दिवालिया होने के कगार पर

वित्तीय संकट से घिरे यूरोपीय बैंकों के लिए मदद का ऐलान नहीं होने के बाद अब जर्मनी का एक बैंक दिवालिया होने के क़रीब है.

जर्मनी में घरों की ख़रीदारी के लिए कर्ज़ देने वाला दूसरा सबसे बड़ा वित्तीय संस्थान हाईपो रियल एस्टेट वित्तीय संकट का शिकार हुआ है.

ये ख़बर ऐसे समय आई है जब यूरोपीय संघ के नेताओं की पेरिस में हुई बैठक में अमरीका जैसे किसी आर्थिक पैकेज को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी.

इसके अलावा शनिवार को जर्मनी के बैंकिंग संघ की तरफ़ से इस संस्थान की मदद से हाथ खींच लेने के बाद इसके दिवालिया होने की संभावनाएँ बढ़ गई हैं.

जानकारों का कहना है कि इस बैंक के दिवालिया होने से इसका प्रभाव दूसरे देशों के वित्तीय संस्थानों पर भी पड़ेगा.

वजूद की लड़ाई

हाईपो रियल एस्टेट कहना है कि जर्मनी का वित्तीय संघ इस बैंक को बचाने के लिए जर्मन सरकार की तरफ़ से हो रहे प्रयासो में शामिल था. लेकिन ऐसा माना जाता है कि 35 अरब यूरो के राहत पैकेज पर सहमति नहीं बन सकी.

ये पता नहीं चल सका है कि जर्मन वित्तीय संघ ने हाथ क्यों खींचे लेकिन हाईपो रियल एस्टेट के प्रवक्ता के अनुसार बैंक अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है.

जानकारों का कहना है कि राहत पैकेज के बिना बैंक कुछ दिनों से ज़्यादा नहीं चल सकता है. इसलिए कोई भी प्रयास सोमवार को बाज़ार खुलने से पहले उठाए जाएँ.

इस सिलसिले में सरकार के प्रतिनिधियों और निजी बैंकों के अधिकारियों के बीच रविवार को एक और बैठक होने की संभावना है.

पैकेज की घोषणा नहीं

शनिवार को ब्रितानी, जर्मन, फ़्रांसिसी और इतालवी नेता संकट से घिरे वित्तीय संस्थाओं को मदद करने पर सहमत हुए थे. लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सर्कोज़ी की पहल पर पेरिस में हुई आपात बैठक में अमरीका की तरह किसी वित्तीय पैकेज की घोषणा नहीं की गई.

इस अवसर पर ब्रितानी प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन ने कहा था कि वित्तीय व्यवस्था में धन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी.

जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल का कहना था कि हर देश को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए.

इन यूरोपीय नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया था जिसमें जल्द से जल्द विकसित देशों के समूह जी-8 का सम्मेलन बुलाने की बात कही गई जिससे वित्तीय बाज़ार को लेकर ज़रूरी क़दमों की समीक्षा की जा सके.