सोमवार, 22 सितंबर, 2008 को 22:59 GMT तक के समाचार
अमरीकी वित्तीय बाज़ारों में उथल पुथल का दौर जारी है.
बाज़ार में ऐसी आशंका बनी हुई है कि अमरीकी वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन ने पिछले सप्ताह वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए जो योजना घोषित की थी, वो कारगर साबित नहीं होगी.
न्यूयॉर्क में सोमवार को शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट देखी गई और निवेशक सोने और तेल में धन निवेश करते देखे गए.
इस वजह से अमरीका में कारोबार के दौरान तेल की क़ीमतों में तेज़ी देखी गई.
इधर अमरीकी के वित्तीय पैकेज को लेकर दोनों डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों ने संदेह जताया है.
डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद बर्नी फ्रेंक ने कहा कि कांग्रेस से वित्तीय पैकेज को तुरंत पारित करने की उम्मीद करना पूरी तरह अनुचित है.
रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य क्रिस्टोफर शैस का कहना था कि कांग्रेस सदस्यों को बहस के लिए पर्याप्त समय चाहिए.
इधर राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि दुनिया हमारी ओर नज़रें गड़ाए हुए हैं कि हम अपने बाज़ारों को उठाने के लिए कितनी जल्दी क़दम उठाते हैं.
ग़ौरतलब है कि बुश प्रशासन ने वित्तीय स्थिति को पटरी पर लाने के लिए 700 अरब डॉलर के पैकेज की घोषणा की थी.
वित्तीय संकट
अमरीका के वित्तीय बाज़ार में ये संकट तब पैदा हुआ जब आवासीय ऋणों की वसूली से जूझ रहे लीमैन ब्रदर्स ने ख़ुद को दिवालिया घोषित कर दिया जबकि मेरिल लिंच को एक अन्य प्रमुख कंपनी ने ख़रीद लिया.
अरबों डॉलर खो चुके लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने की ख़बर का दुनियाभर के शेयर बाज़ारों पर असर हुआ.
दरअसल, अमरीकी वित्त बाज़ार 1930 की आर्थिक मंदी के बाद से अब तक के सबसे बड़े बैंकिंग संकट का सामना कर रहा है.
लीमन ब्रदर्स बैंक से व्यापार करने वाली दुनिया भर की वित्तीय संस्थाएँ अरबों डॉलर का नुक़सान उठाने के कगार पर हैं. इसके बाद दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई.
वित्तीय बाज़ारों की इस गिरावट को थामने के लिए कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने एक संयुक्त कार्रवाई के तहत धन की सप्लाई बढ़ाने का फ़ैसला करना पड़ा.
इस घोषणा के बाद विश्व के शेयर बाज़ारों में कुछ स्थिरता आई है.
हालाँकि पर्यवेक्षकों के मुताबिक बाज़ार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है. ये सारे लक्षण अर्थव्यवस्था और बाज़ारों की चिंता को बढ़ा रहे हैं.
सबकी निगाहें अमरीकी प्रशासन पर लगी हुईं हैं कि वह कितनी दक्षता के साथ इस संकट को संभालता है क्योंकि अगर स्थिति संभली नहीं तो दुनिया के शेयर बाज़ार एक गंभीर संकट की ओर बढ़ सकते हैं.