गुरुवार, 21 अगस्त, 2008 को 14:10 GMT तक के समाचार
भारत में महंगाई रुकने का नाम नहीं ले रही है. गुरुवार को जारी सरकारी आँकड़ों के अनुसार नौ अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में महंगाई बढ़कर 12.63 फ़ीसदी तक पहुँच गई है.
इसके पहले वाले हफ़्ते में यह 12.44 दर्ज की गई थी.
उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार पिछले साल इस दौरान थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 4.24 थी.
महंगाई में 0.19 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी चाय, दालों, कपास, और सीमेंट के मूल्य में वृद्धि के कारण हुई है.
इस दौरान कपास के मूल्य में आठ फ़ीसदी, चाय में दो फ़ीसदी, दुग्ध उत्पाद, दाल और सरसों के तेल में एक फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.
सरकार का फ़ैसला
आयातित खाद्य तेलों में छह फ़ीसदी और सूरजमुखी के तेल के मूल्य में दो फ़ीसदी की कमी भी आई है. वहीं समुद्री मछली, अंडे और मांस के मूल्य में भी मामूली कमी दर्ज की गई है.
इस बीच बढ़ती महँगाई पर काबू पाने के लिए सरकार ने गेहूँ और चावल के सुरक्षित भंडार को खुले बाज़ार में बेचने का फ़ैसला किया है.
इसका फ़ैसला आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में किया गया.
भारत में दो सप्ताह पहले मुद्रास्फीति का आँकड़ा 12 प्रतिशत से नीचे था. 1995 के बाद यह पहला मौक़ा है जब यह आँकड़ा इस स्तर पर पहुँच गया है.
इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक रिज़र्व बैंक एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ा सकता है.
इससे पहले जून-जुलाई में रिज़र्व बैंक तीन बार जल्दी जल्दी ब्याज दर बढ़ा चुका है.
उम्मीद
रिज़र्व बैंक के गवर्नर वाइ वेणुगोपाल रेड्डी ने कहा है कि मुद्रास्फीति में अगले कुछ महीनों में गिरावट की संभावना नहीं दिख रही है.
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि कच्चे तेल के दामों में कमी आने से स्थिति में कुछ सुधार की संभावना है.
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अच्छे मानसून और तेल के दामों में कमी की वजह से अगले कुछ महीनों में मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है.