सोमवार, 30 जून, 2008 को 23:53 GMT तक के समाचार
स्पेन के शहर मैड्रिड में तेल की आसमान छूती क़ीमतों के संबंध में जहाँ तेल उत्पादक देश इस पर चर्चा कर रहे हैं, वहीं सोमवार को तेल की क़ीमतें 144 डॉलर प्रति बैरल की रिकॉर्ड ऊँचाई पर जा पहुँचीं.
प्रेक्षकों का कहना है कि ईरान और इसराइल की बयानबाजी ने इस इस ऊँचाई पर पहुँचा दिया.
बाद में जब ख़बरें आईं कि अप्रैल में अमरीका में तेल की माँग में कमी आई है तो इसकी क़ीमतों में थोड़ी गिरावट आई.
अमरीकी ऊर्जा प्रबंधन प्रशासन का कहना है कि इसकी माँग में पिछले साल की तुलना में 3.9 फ़ीसदी गिरावट आई है.
उल्लेखनीय है कि पिछले साल की तुलना में कच्चे तेल की क़ीमतें दोगुनी हो गई हैं.
दोगुनी वृद्धि
वर्ष 2008 की शुरुआत से इसकी क़ीमतों में लगभग 50 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है.
हालांकि तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक का कहना है कि डॉलर के मूल्य में कमी की वजह से तेल पर सट्टेबाजी बढ़ गई है, इससे तेल की क़ीमत में बढ़ोत्तरी हुई.
इसके साथ ही तेल उत्पादक देश ईरान, इराक़ और नाइजीरिया में तनाव और अस्थिरता को भी तेल की क़ीमतों में वृद्धि की वजह बताते हैं.
इधर ओपेक पर तेल उत्पादन बढ़ाने का दबाव बढ़ा है, पर इस संगठन के सदस्य देशों में तेल का उत्पादन बढ़ाने को लेकर मतभेद हैं.
हाल में सऊदी अरब की पहल पर इस संबंध में एक बैठक हुई थी जिसमें दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातक देशों ने स्वीकार किया था कि पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती क़ीमत को रोकने के लिए उत्पाद में वृद्धि आवश्यक है लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई पक्का वादा नहीं किया था.
सऊदी अरब ने अपने तेल का उत्पादन में बढ़ोत्तरी की घोषणा की थी लेकिन उसका कोई क़ीमतों पर कोई असर नहीं पड़ा.