शुक्रवार, 27 जून, 2008 को 08:33 GMT तक के समाचार
भारत में खाने की वस्तुओं और आवश्यक चीज़ों के कंधे पर सवार महँगाई जून 14 को ख़त्म हुए सप्ताह में 11.42 प्रतिशत के स्तर को छू गई.
ग़ौरतलब है कि सात जून को ख़त्म हुए सप्ताह में महँगाई की दर 11.05 फ़ीसदी पर पहुँच गई थी जो 13 साल का अधिकतम स्तर था.
इससे पहले तीन जून, 1995 को महँगाई की दर 9.89 फ़ीसदी के उच्चतम स्तर पर थी.
भारत सरकार हर सप्ताह थोक मूल्य सूचकांक जारी करती है.
आंकडों के अनुसार खाने की वस्तुओं की कीमत और कपड़े की कीमतें 0.7 फ़ीसदी बढ़ी हैं.
प्राथमिक आवश्यकताओं की कीमतों में 0.2 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है. जबकि इंधन, बिजली और ऊर्जा के लिए ये दर 0.1 फ़ीसदी थी.
सबसे ज़्यादा महँगाई खनिजों में 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. चाय में ये तीन फ़ीसदी रिकॉर्ड की गई.
सरकार की कोशिशें
हाल ही में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा था की आने वाले कुछ हफ्तों तक महँगाई दो अंकों के स्तर पर बनी रह सकती है.
इस माह 25 जून को भारतीय रिज़र्व बैंक ने लगातार बढ़ रही महँगाई पर क़ाबू पाने की कोशिश में अल्पावधि ऋण की दर बढ़ा दी थी. ताज़ा फ़ैसले के बाद रेपो रेट बढ़ कर 8.5 फ़ीसदी और कैश-रिज़र्व-रेश्यो (सीआरआर) बढ़ कर 8.75 फ़ीसदी हो गया है.
सीआरआर दो चरणों में बढ़ेगा. पाँच जुलाई से इसमें 0.25 फ़ीसदी की वृद्धि होगी और इतनी ही बढ़ोत्तरी 19 जुलाई से शुरु होने वाले पखवाड़े में लागू होगी.
रेपो रेट बढ़ाए जाने से ख़ुदरा कारोबार करने वाले बैंकों का ब्याज़ दर भी बढ़ रहा है. भारत के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपनी ब्याज दरो में वृद्धि कर दी है. इससे होम लोन, निजी लोन और वाहन लोन और महँगे हो रहे हैं.
रिज़र्व बैंक महँगाई को क़ाबू में लाने के लिए इस वित्त वर्ष के दौरान कई बार रेपो रेट बढ़ा चुका है.