रविवार, 22 जून, 2008 को 04:08 GMT तक के समाचार
सऊदी अरब ने तेल की क़ीमतों के संबंध में बातचीत के लिए तेल उत्पादक और ख़रीददार देशों का जेद्दा में रविवार को एक सम्मेलन आयोजित किया है.
इस बैठक में बढ़ती तेल की क़ीमतों को लेकर कोई समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी.
इस सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के ऊर्जा मंत्री हिस्सा ले रहे हैं. इनमें भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा भी शामिल हैं.
उल्लेखनीय है कि भारत तेल के बड़े ख़रीददार देशों में से एक है.
तेल की बढ़ती क़ीमतों के कारण दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहे हैं और अमरीका व अन्य देशों ने तेल का उत्पादन बढ़ाने को कहा है.
लेकिन सऊदी अरब की दलील है कि तेल की क़ीमतें में बढ़ोत्तरी तेल की कमी की वजह से नहीं बल्कि इसको लेकर लगाई जा रही अटकलों के कारण हुई है.
दूसरी ओर अमरीकी ऊर्जा मंत्री सैमुअल बॉडमैन का कहना था कि चीन और भारत जैसे विकासशील देशों में माँग बढ़ी है लेकिन उसकी तुलना में आपूर्ति में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है.
उनका कहना था,'' बाज़ार का रुख़ देखने से पता चलता है कि तेल उत्पादन माँग की तुलना में नहीं बढ़ा जिसकी वजह से क़ीमतों में बढोत्तरी हुई और इससे क़ीमतों में इतना उतार चढ़ाव आया.''
भारी उछाल
तेल की क़ीमतें पिछले एक साल में दोगुनी होकर लगभग 130 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गईं हैं.
ग़ौरतलब है कि सऊदी अरब तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है.
पिछले महीने सऊदी अरब ने तेल की क़ीमतों में कमी लाने के लिए अपने तेल उत्पादन में तीन लाख बैरल प्रति दिन की बढ़ोत्तरी की थी.
इसके बाद ख़बरें आईं थीं कि सऊदी अरब जुलाई ने अपने तेल का उत्पादन प्रति दिन दो लाख बैरल बढ़ा देगा.
इस सम्मेलन में सऊदी अरब इस घोषणा की पुष्टि करेगा.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका तेल की क़ीमतों पर कोई ख़ास असर नहीं होगा.
ख़बरों में कहा जा रहा है कि बढ़ती माँग के कारण जुलाई महीने के अंत तक कच्चे तेल की क़ीमत 150 अमरीकी डॉलर को भी पार कर सकती हैं.