रविवार, 22 जून, 2008 को 12:21 GMT तक के समाचार
भारत ने कच्चे तेल की क़ीमत एक निश्चित दायरे में रखने की अपील की है.
सऊदी अरब के जेद्दा में उर्जा मंत्रियों की एक बैठक में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के लिए सटोरियों को ज़िम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा कि इससे विकासशील देशों की आर्थिक उपलब्धि को ख़तरा पहुँच रहा है. पी चिदंबरम ने कहा, "इस मामले में सिर्फ़ एक ही रास्ता है कि तेल उत्पादक और ख़रीदार एक सर्वमान्य तरीक़ा अपनाए. हम इसका प्रस्ताव रखते हैं कि कच्चे तेल की क़ीमतों को एक निश्चित दायरे में रखा जाए."
इस बीच तेल उत्पादक देशों और ख़रीदार देशों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए सऊदी अरब के शाह अब्दुल्लाह ने कहा कि उनका देश तेल का उत्पादन बढ़ा रहा है.
उन्होंने बताया कि अब सऊदी अरब प्रतिदिन 97 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन करेगा. शाह अब्दुल्लाह ने यह भी घोषणा की कि उनका देश तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक में विकासशील देशों के लिए गठित एक कोष में एक अरब डॉलर देने की घोषणा की.
बढ़ती क़ीमतें
इस बीच ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इन अटकलों को ठुकरा दिया कि बढ़ती मांग के कारण कच्चे तेल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं.
उन्होंने कहा कि इसकी वजह कुछ और है. उन्होंने तेल उत्पादक देशों और ख़रीदार देशों से अपील की कि वे तेल व्यापार से सटोरियों को अलग रखें.
कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमतों के कारण ही भारत सरकार ने इस महीने के शुरू में पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी की थी और इस वजह से मुद्रा स्फ़ीति की दर 13 साल के सबसे ऊँचे स्तर यानी 11 से भी अधिक हो गई.
वित्त मंत्री ने तेल उत्पादक देशों को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तेल की बढ़ती कीमतों के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुज़री तो इसका सभी को नुक़सान होगा. हमारा ये पक्के तौर पर मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की मौजूदा क़ीमत ना तो तेल उत्पादक देशों और न ख़रीदार देशों के हित में है."
तेल उत्पादक देशों और ख़रीदार देशों के सम्मेलन में वित्त मंत्री पी चिदंबरम के अलावा पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा भी हिस्सा ले रहे हैं.