शुक्रवार, 13 जून, 2008 को 07:26 GMT तक के समाचार
अब तक एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे याहू और गूगल के बीच एक समझौता हुआ है. इसके तहत याहू गूगल की ऑनलाइन विज्ञापन तकनीक का सहारा ले सकेगा.
दूसरी ओर याहू सर्च इंजन के परिणामों के साथ गूगल के विज्ञापन दिखाई देंगे. हालाँकि ये समझौता केवल अमरीका और कनाडा के लिए होगा.
याहू के अधिग्रहण की माइक्रोसॉफ़्ट की कोशिशें विफल होने के बाद इस समझौते को अहम माना जा रहा है.
माइक्रोसॉफ़्ट ने अपने गिरते विज्ञापन व्यवसाय के चलते याहू पर नज़रें गड़ाईं थीं. महीनों मोल-भाव करने के बाद भी दोनों के बीच सौदा नहीं पट सका था.
तगड़ा सौदा
याहू का कहना है की ये समझौता उसके लिए 32 अरब रूपए से अधिक का अतिरिक्त राजस्व ला सकता है.
गूगल के चेयरमैन एरिक श्मिटज़ का कहना है, "यह समझौता याहू को अवसर प्रदान करता है की वो अपना सर्च इंजन इस्तेमाल करने वालों को अधिक उपयोगी विज्ञापन उपलब्ध करा पाए. साथ ही विज्ञापनदाताओं और प्रकाशकों को बेहतर विज्ञापन तकनीक दे पाए".
याहू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेरी यंग का कहना है, “हमारा मानना है कि खोज और प्रदर्शन का संयोजन ही आने वाले दिनों में सबसे बड़ी चीज़ होगी."
शुरुआत में ये समझौता चार साल के लिए होगा.
एकाधिकार की आशंका
गूगल का कहना है कि इस समझौते को किसी तरह की क़ानूनी अनुमति की ज़रूरत नहीं है फिर भी अमरीका के राष्ट्रीय न्याय विभाग को इस समझौते की समीक्षा का अवसर देने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा. तब तक यह समझौता लागू नहीं होगा.
बीबीसी के तकनीकी संवाददाता रोरी कैशलिन जोन्स का कहना है कि इस समझौते पर अमरीका के प्रतियोगिता नियंत्रकों की निगाह पड़ने कि पूरी संभावना है.
जोन्स कहते हैं " अप्रैल में जब याहू ने गूगल की तकनीक का 'सीमित' इस्तेमाल शुरू किया था तभी से संसद में घंटियाँ बजने लगी थीं".
अमरीकी संसद की एंटी-ट्रस्ट उप समिति के अध्यक्ष हर्ब कोल मानते हैं कि इस समझौते का विज्ञापनदाताओं और उपभोक्ताओं के लिए दूरगामी
परिणाम हो सकते हैं.