केन्द्रीय अमरीकी बैंक फ़ेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष बेन बरनानकि ने कहा है कि देश ने मंदी के ख़तरे से मुक्ति पा ली है.
हालांकि अमरीकी बाज़ार पिछले सप्ताह जारी बढ़ती बेरोज़गारी संबंधी आँकड़ों और तेल की कीमतों में तेज़ी से डरे हुए हैं.
पर बरनानकि का कहना है कि सरकार के आर्थिक पैकेज और ब्याज दरों में कटौती से संभावित मंदी को रोका जा सकेगा.
वाशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा नहीं लगता की बरनानकि के बयानों से आम अमरीकी का डर कुछ कम होगा.
मई माह के आँकड़ों में बेरोज़गारी को दो दशकों में अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर दिखाया गया है.
अब भी लोग घरों पर लिए कर्ज़ नहीं चुका पा रहे हैं. ईंधन की कीमतें चार डॉलर प्रति गैलन पर पहुँच गई है.
बरनानकि ने सोमवार रात मैसाचुसेट्स में फ़ेडरल रिज़र्व के एक सम्मेलन में कहा कि अन्य आर्थिक ताकतें मंदी को रोक सकती हैं.
केन्द्रीय बैंक ने पिछले दिनों ब्याज की दरों में भारी कटौती की है. सरकार देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने के लिए 168 बिलियन डॉलर खर्च कर रही है. इसके अलावा करों में कटौती भी की है.
बरनानकि का कहना है कि इन क़दमों से कर्ज़ बाज़ार में थोड़ा बेहतरी आई है और अर्थव्यवस्था में आगे गिरावट रुक सकती है.
इन कदमों के बावजूद बढ़ती मुद्रास्फ़ीति की नई समस्या मुंह बाँए खड़ी है.
अगर लोगों को तेल के दाम कम होते नहीं दिखे तो वो अपनी ख़र्च की प्राथमिकताओं में बदलाव ला सकते हैं जिससे मुद्रास्फ़ीति के और बढ़ने का अंदेशा है.
इसके अलावा डॉलर के कम होते भाव के कारण केन्द्रीय बैंक ब्याज की दरों में बढ़ोत्तरी के लिए मजबूर हो सकता है.
ऐसा इस साल में आगे या अगले साल हो सकता है.