रविवार, 08 जून, 2008 को 03:12 GMT तक के समाचार
दुनिया के विकसित देशों जी-8 के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक जापान में हो रही है. इन देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने कहा है कि वे घरेलू स्तर पर ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देंगे.
जी-8 देशों के अलावा इस बैठक में भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं.
बैठक में इस बात पर सहमति हुई कि तनकीक और संरक्षण पर ज़ोर दिया जाए.
अमरीका के ऊर्जा मंत्री सैम्युल बॉडमैन ने कहा है कि वैकल्पिक ऊर्जा तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ज़्यादा निवेश की ज़रूरत है.
बैठक में तेल की बढ़ती क़ीमतों के दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले गंभीर असर पर विचार किया जा रहा है.
दूसरी ओर भारत सरकार ने साफ़ कर दिया कि वह पेट्रोल, डीजल और एलपीजी क़ीमतों में की गई बढ़ोत्तरी को वापस नहीं लेगी.
पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने शनिवार को एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि कीमतों में बढ़ोत्तरी का फ़ैसला अंतिम है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
देवड़ा ने सफ़ाई दी कि तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए दाम बढ़ाए जाने ज़रूरी थे.
इधर तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है और ये 139 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची है.
इसके पहले ऊर्जा की सबसे ज़्यादा खपत करने वाले विश्व के पाँच बड़े देशों अमरीका, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत ने तेल की क़ीमतों में कमी लाने के लिए उत्पादन बढ़ाने की अपील की.
अमरीकी ऊर्जा मंत्री सैमुअल बॉडमैन ने कहा कि शुक्रवार को एक बैरल कच्चे तेल की क़ीमत का 139 अमरीकी डॉलर तक पहुँच जाना एक झटका है.
हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि कच्चे तेल के आसमान छूती क़ीमतों के कारण दुनिया के सामने कोई संकट आ सकता है.
बॉडमैन ने अपील की थी कि उपभोक्ता देश अपने यहाँ तेल पर सब्सिडी ख़त्म करें और उत्पादक देश अपना उत्पादन बढ़ाएँ.
ख़बरों में कहा जा रहा है कि बढ़ती माँग और राजनीतिक तनाव के कारण जुलाई महीने के अंत तक कच्चे तेल की क़ीमत 150 अमरीकी डॉलर को भी पार कर सकती है.