शुक्रवार, 06 जून, 2008 को 14:31 GMT तक के समाचार
अमरीका में बेरोज़गारी पिछले दो दशक में सबसे ऊँचाई पर पहुँच गई है यानी पिछले क़रीब बीस वर्षों में इस समय वहाँ सबसे ज़्यादा लोग बेरोज़गार हैं और किसी रोज़गार की तलाश कर रहे हैं.
अमरीकी अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है और बेरोज़गारी से संबंधित इन ताज़ा आँकड़ों से नज़र आता है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था में मंदी का असर हो रहा है.
मई महीने में अमरीका में बेरोज़गार लोगों की संख्या 5.5 प्रतिशत हो गई जबकि उससे पहले तक यह पाँच प्रतिशत थी. इन आँकड़ों में बढ़ोत्तरी होने का मतलब है कि अमरीका अर्थव्यवस्था में प्रगति रुक गई है यानी वो ठहर गई है.
बेरोज़गारी बढ़ने से यह स्पष्ट है कि अमरीका में बहुत सी कंपनियाँ अब नई नौकरियाँ नहीं दे रही हैं क्योंकि उनके मुनाफ़ों में कमी आई है.
उपभोक्ताओं की ख़र्च करने की क्षमता कम हुई है, दूसरी तरफ़ खाने-पीने की ज़रूरी चीज़ों और तेल की बढ़ती क़ीमतों ने आग में घी का काम किया है.
अमरीका के श्रम मंत्रालय ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था को लगभग 40 हज़ार ऐसी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है जो ग़ैर-कृषि क्षेत्र में थीं.
अप्रैल में कहा गया था कि लगभग 28 हज़ार नौकरियाँ ख़त्म हो गई हैं हालाँकि इससे कहीं ज़्यादा लोगों की नौकरियाँ ख़त्म होने की आशंका व्यक्त की गई थी.
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि इन आँकड़ों से यह डर बढ़ने लगा है अमरीका अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है.
अमरीकी फ़ैडरल रिज़र्व ने हाल के महीनों में ब्याज दरों में ख़ासी कटौती की है ताकि अर्थव्यवस्था में मंदी से बचा जा सके और वृद्धि दर बरक़रार रहे.
एक चिंता की बात ये भी है कि कमज़ोर श्रम बाज़ार की वजह से उपभोक्ता अपने ख़र्च पर लगाम कसेंगे जिससे बड़ी कंपनियों का मुनाफ़ा कम होगा.
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि बेरोज़गारी बढ़ने के ये ताज़ा आँकड़े चौकाने वाले हैं और ऐसी उम्मीद नहीं की जा रही थी.
हालाँकि आर्थिक विश्लेषकों ने कुल मिलाकर तीस हज़ार से 58 हज़ार के बीच नौकरियाँ ख़त्म होने का अनुमान लगाया था.