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बुधवार, 04 जून, 2008 को 10:36 GMT तक के समाचार

चार कारखाने बंद करेगा जनरल मोटर्स

जनरल मोटर्स ने पर्यावरण अनुकूल कारों के निर्माण पर ध्यान देने के लिए ट्रक और स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहनों के चार कारखाने बंद करने का फ़ैसला किया है.

कंपनी की ये फ़ैक्ट्रियाँ अमरीका, कनाडा और मैक्सिको में हैं.

पिछले दिनों जनरल मोटर्स के कुछ कारखानों में हड़ताल हुई थी और उसका असर एसयूवी के उत्पादन पर भी पड़ा है.

तेल की लगातार चढ़ रही क़ीमतों ने लोगों का ध्यान छोटी गाड़ियों की ओर खींचा है. शायद यही वजह है कि जनरल मोटर्स भी अपनी 'हमर' ब्रांड को बेचने की सोच रहा है.

जनरल मोटर्स के निदेशक मंडल ने ओहियो के कारखाने में एक नई छोटी शेरवले कार और डेट्रोइट के कारखाने में 'शेवी वोल्ट इलेक्ट्रिक' वाहन के उत्पादन की मंज़ूरी दी है.

कंपनी के मुखिया रिक वैगनर ने कहा कि जिन कारखानों को बंद किया जा रहा है उनमें कनाडा के ओशावा और ओंटारियो, ओहियो के मोरेन, विसकॉन्सिंन के जेंसविले और मेक्सिको के तोलुका के कारखाने शामिल हैं.

बचत का लक्ष्य

जनरल मोटर्स विश्व की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है.

कंपनी का कहना है कि ऐसा क़दम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि तेल किफ़ायती वाहनों की बढ़ती माँग को पूरा किया जा सके और उत्तरी अमरीका में आर्थिक और बाज़ार की चुनौतियों का मुक़ाबला किया जा सके.

जनरल मोटर्स को पिछले तीन साल में 51 अरब अमरीकी डॉलर का नुक़सान हुआ है.

कंपनी का कहना है कि इन चार कारखानों को भविष्य में किसी मॉडल के उत्पादन का काम देने की कोई योजना नहीं है.

उसका कहना है कि इन कारखानों की बंदी से कंपनी को वर्ष 2010 से सालाना एक अरब अमरीकी डॉलर की बचत होगी.

हालाँकि कंपनी के प्रमुख वैगनर का कहना है कि जनरल मोटर्स मुनाफ़ा में लौट आने की कोई समय सीमा तय करने की स्थिति में नहीं है.

मुश्किल समय

अक्टूबर, 2007 के बाद से जनरल मोटर्स के शेयरों में 60 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कंपनी घबराहट में हैं कि 'हमर' ब्रांड का क्या करें और क्या न करें. इसे नए सिरे से सँवारा जा सकता है या फिर इसे बेचा भी जा सकता है.

जनरल मोटर्स की शेयरधारक कंपनी 'ओक ब्रुक इनवेस्टमेंट्स' के मुख्य निवेश अधिकारी पीटर जैनकोव्सकिस कहते हैं, "दुर्भाग्य से यह इस बात का संकेत है कि एक बार फिर ये लोग समय के साथ ख़ुद को नहीं बदल पा रहे हैं."

वे कहते हैं, "अगर वे हमर ब्रांड को बेचने की सोच रहे थे तो बेहतर होता कि वे इसे तीन साल पहले बेच देते."

उनका मानना है, "इससे उन्हें कुछ हासिल होने वाला नहीं है. समय के हिसाब से भी यह एक ख़राब उदाहरण है."