ब्लैकबेरी मोबाइल फ़ोन बनाने वाली कनाडा की कंपनी ने भारत के दूरसंचार विभाग की मांग को ठुकरा दिया है.
दूरसंचार विभाग ने मांग की थी कि ब्लैकबेरी को तकनीक सेवा देने वाली कंपनी रिसर्च इन मोशन यानी रिम संदिग्ध ईमेल को 'डिकोड' करने में मदद करे.
ब्लैकबेरी का कहना है कि उसकी तकनीक इतनी सुरक्षित है कि नेटवर्क पर भेजे गए ईमेल को डिक्रिप्ट यानी खोलने की इजाज़त खुद कंपनी को भी नहीं है.
दरअसल भारत में ब्लैकबेरी इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है.
ऐसे में सरकार का मानना है कि ब्लैकबेरी का इस्तेमाल चरमपंथी और आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है.
इसके संदेश को भारत में पढ़ा नहीं जा सकता क्योंकि ब्लैकबेरी का सर्वर कनाडा में लगा हुआ है.
निगरानी की माँग
पिछले दिनों भारतीय दूरसंचार विभाग ने ब्लैकबेरी से ये मांग की थी कि वो अपना सर्वर भारत में लगाए ताकि भेजी गई ईमेल पर निगरानी रखी जा सके.
दुनिया के कई देश इस तरह की आशंका ज़ाहिर कर चुके हैं.
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि चरमपंथी अपनी गतिविधियों के लिए इंटरनेट और ईमेल का इस्तेमाल कर रहे हैं.
उनका कहना है कि ब्लैकबेरी तकनीक को ‘डिकोड’ करना काफ़ी मुश्किल है और ये देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता है.
भारतीय अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में ब्लैकबेरी को तकनीक सेवा देने वाली कंपनी रिसर्च इन मोशन यानी रिम ने कहा, "हमारी तकनीकी सेवा की सुरक्षा इतनी सुदृढ़ है कि किसी भी हालत में कोई भी तीसरा शख्स इन संदेशों को डिक्रिप्ट नहीं कर सकता."
भारत में भारती एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशन्स, वोडाफ़ोन और बीपीएल मोबाइल ब्लैकबेरी की सुविधाएँ देते हैं.
भारत में तकरीबन एक लाख 15 हज़ार लोग ब्लैकबेरी का इस्तेमाल करते हैं और लगातार इसके ग्राहक बढ़ते जा रहे हैं.