रविवार, 18 मई, 2008 को 10:18 GMT तक के समाचार
प्राची पिंगले
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
कारोबारी दुनिया और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में खूब इस्तेमाल होने वाला शब्द 'सेंसेक्स' अब विवादों में फंस गया है.
अब बीएसई इस शब्द 'सेंसेक्स' को अपने नाम से रजिस्टर कराना चाहता है.
लेकिन, एक आर्थिक विश्लेषक दीपक मोहोनी ने दावा किया है कि ये शब्द उनकी ईजाद है और 1989 में उन्होंने इसे अपने लेखों में भरपूर इस्तेमाल किया था जिसके बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने इसे अपनाया.
दरअसल, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सेंसिटिव इंडेक्स यानी संवेदी सूचकांक को छोटे रूप में 'सेंसेक्स' लिखा जाता है.
लेकिन ये शब्द इतना चलन में आया कि लोग संवेदी सूचकांक को भूलकर इसे ही इस्तेमाल करने लगे.
फ़िलहाल बीएसई इस बारे में कुछ भी नहीं कह रहा है.
क्या है दावा ?
मोहोनी ने 1989-90 के अपने कुछ ऐसे लेख और रिपोर्ट पेश किए हैं जो ये साबित करते हैं कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के काफ़ी पहले से वो इस शब्द सेंसेक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.
“मुझे बीएसई सेंसिटिव इंडेक्स इस्तेमाल करना काफ़ी भारी-भरकम और बोझीला लगता था. मैंने इसकी जगह सेंसेक्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. इसके बाद और लोगों ने भी इसे अपना लिया और ये चल पड़ा.”
मोहोनी के दावे का समर्थन आर जगन्नाथ भी करते हैं. जगन्नाथ उस वक्त एक अखबार के संपादक हुआ करते थे. वो फ़िलहाल मुंबई के एक अख़बार डीएनए के संपादक हैं.
जगन्नाथ कहते हैं, "बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सेंसिटिव इंडेक्स काफ़ी लंबा होता था और ये बोलने में काफ़ी लंबा होता था."
"यहाँ तक कि शेयर बाज़ार के दलाल भी इसे ठीक से नहीं बोल पाते थे. वो इसे सेंसिटी इंडेक्स या कुछ और कह जाते थे."
"जब मोहोनी ने इसकी जगह सेंसेक्स लिखना शुरू किया तो दूसरे व्यवसायिक अख़बारों ने भी इसे इस्तेमाल करना शुरू कर दिया."
मोहोनी का ट्रेडमार्क !
मोहोनी कहते हैं कि उन्होंने इस शब्द सेंसेक्स को कभी एक ट्रेडमार्क के तौर पर रजिस्टर कराने की ज़रूरत भी नहीं समझी.
वो कहते हैं, "2003 में भारत में ट्रेडमार्क क़ानून में बदलाव के पहले तो ये मुमकिन ही नहीं था."
कुछ महीने पहले जब मोहोनी को मालूम चला कि बीएसई इस शब्द सेंसेक्स को अपने ट्रेडमार्क के तौर पर रजिस्टर कराना चाहता है तो उन्होंने अपना दावा रखा.
मोहोनी बताते हैं कि इसके बाद बीएसई के वकीलों ने उनसे संपर्क किया और कहा कि वो अपना दावा वापस ले लें क्योंकि सही नहीं है.
इसके बाद उन्होंने पुणे की अदालत का दरवाज़ा खटखटाया. मोहोनी पुणे के ही रहने वाले हैं.
मोहोनी ने अदालत में दाखिल की गई अपनी अर्ज़ी में लिखा है, "1989 में सेंसेक्स शब्द मैंने ईजाद किया, उछाला और प्रचलित किया. लिहाज़ा इस पर मेरा अधिकार है."
मोहोनी ने अदालत में बीएसई का वो नोटिस भी पेश किया है जिसमें उनसे कहा गया है कि वो सेंसेक्स पर अपना दावा छोड़ दें.
यहाँ तक कि इस नोटिस में मोहोनी को ये भी कहा गया है कि वो इसी तरह के या इससे मिलते जुलते किसी भी शब्द पर भी दावा न करें.
सेंसेक्स की जगह क्या होगा ?
मोहोनी कहते हैं कि अगर बीएसई इस मामले में जीत जाता है तो इससे उनकी परामर्शी सेवाएं प्रभावित होंगी.
बीएसई के कॉरपोरेट मामले के प्रमुख कल्याण बोस का कहना है, "ये मामला फ़िलहाल अदालत में है इसलिए इस पर फ़िलहाल कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती."
वैसे, इस सब के बाद एक सवाल ये भी उठता है कि अगर दीपक मोहोनी अदालत में जीत जाते हैं तो फिर हम और आप सब, बोलचाल और लिखने-पढ़ने में इस्तेमाल होने वाले शब्द सेंसेक्स की जगह क्या इस्तेमाल करेंगे.
क्या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक ?