बुधवार, 07 मई, 2008 को 21:14 GMT तक के समाचार
एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि माँग और आपूर्ति में ऐसा ही अंतर बना रहा, जैसा कि इस समय है तो छह महीने के न्यूनतम समय में ही तेल की क़ीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँचेगी.
पहली बार कच्चे तेल की क़ीमतें 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचने के बाद यह चेतावनी जारी की गई है.
ऊर्जा रणनीतिकार आर्गुन मूर्ति का कहना है कि छह महीने से दो साल के भीतर तेल की क़ीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल को पार कर जाएगी.
तेल की क़ीमतें पिछले चार महीने में 25 प्रतिशत तक बढ़ी है और पिछले सात सालों में तेल की क़ीमतों में 400 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.
बुधवार को न्यूयॉर्क बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत 123.53 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची जबकि लंदन में पहली बार क़ीमतें 122.32 डॉलर तक जा पहुँची.
मूर्ति ने तीन साल पहले यह ठीक अनुमान लगाया था कि तेल की क़ीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक हो जाएगी. उस समय तेल की क़ीमत 55 डॉलर प्रति बैरल थी.
चीन की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते वहाँ तेल की ज़रुरत बढ़ी है और इससे थोड़ी कम ज़रुरत भारत की है जहाँ अर्थव्यवस्था बढ़ रही है.
ये दोनों ही देश अब तेल की माँग के मामले में अमरीका, यूरोपीय संघ और जापान की बराबर पहुँचने लगे हैं.
नाइजीरिया और उत्तरी इराक़ से तेल की आपूर्ति में बाधा की आशंका और अमरीकी बाज़ार में तेल की माँग बढ़ने के आकलनों के चलते कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है.
अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि पहले से कमज़ोर पड़ी अर्थव्यवस्था तेल की बढ़ती क़ीमतों के चलते और नीचे जा सकती है.