रविवार, 04 मई, 2008 को 07:23 GMT तक के समाचार
आखिरकार माइक्रोसॉफ़्ट ने याहू को ख़रीदने की योजना से अपने क़दम पीछे खींच लिए हैं.
सॉफ्टवेयर क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट पिछले तीन महीने से याहू को ख़रीदने की कोशिश में थी.
लेकिन दोनों कंपनियों के बीच पैसों को लेकर क़रार नहीं हो पाया.
माइक्रोसॉफ़्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीव बाल्मर ने याहू के प्रमुख जेरी यांग को एक पत्र लिखकर बताया कि वो उनकी कंपनी को खरीदने की दौड़ से हट रहे हैं.
माइक्रोसॉफ़्ट ने याहू के हर शेयर के लिए 33 डॉलर की क़ीमत लगाई थी. लेकिन याहू इस क़ीमत पर सौदे के लिए तैयार नहीं था.
हालाँकि, याहू को ख़रीदने के लिए माइक्रोसॉफ़्ट की तरफ़ से पहले 44.6 अरब डॉलर की बोली लगाई गई थी.
जिसे कि बाद में माइक्रोसॉफ़्ट ने बढ़ा कर 47.5 अरब डॉलर कर दी थी.
लेकिन जेरी यांग याहू को 53 अरब डॉलर में बेचना चाहते थे.
क्यों थी क़रार के लिए बेक़रारी ?
दरअसल, माइक्रोसॉफ़्ट इस क़रार के ज़रिए इंटरनेट क्षेत्र की ही कंपनी गूगल को पछाड़ना चाहता था.
गूगल को इंटरनेट के ज़रिए सबसे ज़्यादा विज्ञापन मिलते हैं.
इंटरनेट पर 2007 में 40 अरब डॉलर के विज्ञापनों का कारोबार हुआ था.
2010 तक इस कारोबार के दोगुना यानी तक़रीबन 80 अरब डॉलर के होने की उम्मीद है.
माइक्रोसॉफ़्ट की वेबसाइट पर छपे अपने पत्र में स्टीव बाल्मर ने लिखा है, "हमने याहू को ख़रीदने की भरपूर कोशिश की. हमने कीमत को तक़रीबन 5 अरब डॉलर बढ़ा भी दिया. लेकिन याहू ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी."
इस पत्र में आगे लिखा है, "तमाम पहलुओं पर ग़ौर करने के बाद माइक्रोसॉफ़्ट को लगता है कि याहू का प्रस्ताव हमें जंच नहीं रहा है लिहाज़ा माइक्रोसॉफ़्ट के शेयरधारकों, कर्मचारियों के हितों को देखते हुए हम अपना प्रस्ताव वापस लेते हैं."
माइक्रोसॉफ़्ट के प्रस्ताव को वापस ले लेने के बाद याहू ने दोहराया कि माइक्रोसॉफ़्ट की तरफ़ से उनकी कंपनी को खरीदने के लिए लगाई गई बोली काफ़ी कम थी.
माइक्रोसॉफ़्ट के प्रस्ताव को वापस लेने के बाद याहू के अध्यक्ष रॉय बोस्टोक ने एक बयान में कहा कि उनकी कंपनी अब अपना ध्यान दूसरे प्रस्तावों की तरफ़ लगाएगी.
शुक्रवार को शेयर बाज़ार बंद होते वक्त माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों की कीमत 29.24 डॉलर थी जबकि खरीदी के प्रस्ताव की वजह से याहू के शेयर 1.85 डॉलर बढ़कर 28.67 डॉलर पर बंद हुए थे.
लेकिन जानकारों का मानना है कि रविवार को इस क़रार के नाकामयाब हो जाने की वजह से याहू के शेयरों पर सीधा असर पड़ेगा.