गुरुवार, 17 अप्रैल, 2008 को 18:08 GMT तक के समाचार
सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
भारतीय रिज़र्व बैंक ने विभिन्न बैंकों के रिज़र्व बैंक में जमा की जाने वाली राशि यानि कैश रिज़र्व रेशियो की दर में दो चरणों में 0.5 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी की घोषणा की है.
यानी अब विभिन्न बैंकों को कुछ और पैसा रिज़र्व बैंक में रखना पड़ेगा.
बैंक का यह फ़ैसला बढ़ती मंहगाई को रोकने की दिशा में उठाया गया क़दम माना जा रहा है. इससे गृह और अन्य कर्ज़ों की दरें बढ़ जाने की आशंका है.
इस फ़ैसले से रिज़र्व बैंक में विभिन्न बैंकों से क़रीब 18 हज़ार पांच सौ करोड़ रुपया आ सकेगा.
बढ़ती मंहगाई पर क़ाबू पाने के लिए केंद्र सरकार के कुछ फ़ैसलों के बाद रिज़र्व बैंक ने इस दिशा में एक क़दम उठाया है.
पहले यह दर साढे़ सात प्रतिशत थी जो अब दो चरणों में दस मई तक बढ़कर आठ प्रतिशत हो जाएगी.
आम तौर पर जब रिज़र्व बैंक कैश रिज़र्व रेशियो बढ़ाता है तो विभिन्न बैंक कर्ज़ की दरें बढ़ा देते हैं जिससे लोग कर्ज़ लेने से कतराते हैं.
महंगाई की मार
विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि लोग क़र्ज़ लेकर घरेलू सामान नहीं खरीदते इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि रिज़र्व बैंक के इस फ़ैसले से मंहगाई पर तत्काल कितनी लगाम लगाई जा सकेगी.
माना जा रहा है कि अप्रैल महीने के अंत में रिज़र्व बैंक सालाना क्रेडिट नीति जारी करनेवाला है और सभी बैंक कर्ज़ों पर ब्याज़ दर बढ़ाने से पहले इसका इंतज़ार करेंगे.
उल्लेखनीय है कि मुद्रीस्फीति की दर जहां जनवरी महीने में क़रीब चार प्रतिशत थी वो मार्च में बढ़कर क़रीब साढे सात प्रतिशत पहुंच गई.
इसके बाद सरकार को इस पर नियंत्रण के लिए कई फ़ैसले करने पड़े.
अब रिज़र्व बैंक के अनुसार पांच अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार यह दर मार्च के 7.41 प्रतिशत से घटकर 7.14 पर आई है जो संभवत सरकारी फ़ैसलों का नतीजा हो सकती है.
सरकार ने पिछले दिनों कई खाद्य पदार्थों पर सीमा शुल्क हटाने का निर्णय किया था.
साथ ही ग़ैर बासमती चावल और दालों के निर्यात पर भी रोक लगा दी थी.
लेकिन इसके बावजूद अब भी फल, सब्ज़ी, तेल, चाय यानी घरेलू ज़रूरत के सामानों की क़ीमतें आसमान छू रही हैं जो न केवल आम जनता के लिए बल्कि सरकार और रिज़र्व बैंक के लिए भी अब सिरदर्द साबित हो रही हैं.