रविवार, 13 अप्रैल, 2008 को 06:19 GMT तक के समाचार
ऐसा नहीं है कि बढ़ती महंगाई सिर्फ़ भारत का ही मुद्दा हो बल्कि, खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ रही क़ीमतें पूरी दुनिया के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस ने चेतावनी दी है कि अगर खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ रही क़ीमतों पर क़ाबू नहीं पाया गया तो हज़ारों लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है.
स्ट्रॉस ने कहा कि खाने-पीने की चीज़ों और अनाज की क़ीमतों को लगातार बढ़ते रहने से नहीं रोका गया तो एक बड़ी परेशानी पैदा हो सकती है.
पिछले दिनों खाद्य पदार्थों की आसमान छूती क़ीमतों और इसकी कालाबाज़ारी की वजह से हेती, फ़िलीपींस और मिश्र में तो दंगे तक भड़क चुके हैं.
इस बीच शनिवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भी खाद्य पदार्थों को लेकर दंगे भड़क गए थे.
वित्तीय संकट पर चर्चा
दुनिया के कई देशों में खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए वॉशिंगटन में 24 देशों के वित्त मंत्रियों की एक बैठक हुई जिसमें खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे वित्तीय संकट पर भी चर्चा की गई.
इस मौक़े पर डेमिनिक स्ट्रॉस ने कहा, "हज़ारों लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है. कई हज़ार बच्चे कुपोषण का शिकार हो सकते हैं. ये स्थिति उनकी पूरी ज़िंदगी पर असर डाल सकती है."
स्ट्रॉस ने कहा कि ये सारे हालात कारोबार में भी असंतुलन की स्थिति पैदा कर सकते हैं जिसकी चपेट में विकसित देश भी आ सकते हैं.
पिछले कुछ महीनों में खाद्य पदार्थों की क़ीमतें बेहद तेज़ी से बढ़ी हैं.
जानकारों के मुताबिक इसकी वजह लगातार बढ़ रही मांग, कुछ देशों में मौसम का ख़राब होना और खेती की ज़मीन पर खाद्य पदार्थों की जगह जैविक ईंधन देने वाले पौधों की खेती करना है.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की संचालन समिति ने अपने सभी 185 सदस्य देशों को सलाह दी कि वो वित्तीय संकट और घरेलू बाज़ार की आसमान छूती क़ीमतों को क़ाबू करने के लिए सख़्त क़दम उठाएँ.
भारत ने भी महंगाई पर क़ाबू पाने के लिए बासमती चावल, गेहूँ, दाल और दूसरे खाद्य पदार्थों के निर्यात पर रोक लगा दी है.
वहीं, इस्पात मंत्री राम विलास पासवान ने इस्पात के निर्यात पर भी रोक लगाने की सिफ़ारिश की है.