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गुरुवार, 13 मार्च, 2008 को 15:42 GMT तक के समाचार

सोने की क़ीमतों में रिकॉर्ड उछाल

अमरीका मुद्रा डॉलर की कमज़ोर हालत के माहौल में सोने की क़ीमतें पहली बार एक हज़ार डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं.

अमरीका अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर आने की आशंकाओं के बीच बहुत से निवेशक सोने जैसी चीज़ों में अपना धन लगा रहे हैं और शेयर या अमरीकी डॉलर ख़रीदने से बच रहे हैं.

भारत में गुरूवार को 24कैरट सोने की क़ीमतें 12947 रुपए प्रति तोला यानी दस ग्राम के आसपास रहीं.

साल 2008 शुरू होने के बाद से सोने की क़ीमत में लगभग 20 प्रतिशत उछाल आया है. साल 2007 में सोने की क़ीमतें 32 प्रतिशत बढ़ी थीं.

बाज़ार के विश्लेषकों का कहना है कि जब तक अमरीकी अर्थव्यवस्था और डॉलर कमज़ोर रहेंगे तब तक सोने की क़ीमतें प्रति औंस 1000 डॉलर के आसपास ही रहने की संभावना है.

फ़ोर्टिस बैंक का कहना है, "अमरीका अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ हर ख़राब आँकड़ा सोने को दो तरह से बढ़ने में मदद देता है. पहला ये कि इससे निवेश की सुरक्षित का भरोसा है और दूसरा ये कि डॉलर की क़ीमतें काफ़ी कुछ इस पर निर्भर करती हैं कि फ़ैडरल रिज़र्व ब्याज़ दरों में कितनी कटौती और करता है."

ब्याज़ दरें और महंगाई

बुधवार को भी दुनिया की कुछ महत्वपूर्ण मुद्राओं के मुक़ाबले डॉलर की क़ीमतों में गिरावट आई. यूरो और जापानी येन भी डॉलर से मज़बूत नज़र आए.

एक समय तो एक डॉलर की क़ीमत 100 येन से भी कम हो गई थी और 1995 के बाद पहली बार हुआ.

यूरो के मुक़ाबले भी डॉलर ढीला रहा और एक यूरो की क़ीमत 1.562 डॉलर हो गई थी. बाज़ार के जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे बैंकों और ऐसे निवेश संस्थानों के आँकड़े सामने आएंगे जो अमरीका में अचल संपत्ति के क्षेत्र में निवेश करते रहे हैं तो डॉलर की क़ीमतों में और ज़्यादा कमी आ सकती है.

बहुत सी कंपनियाँ पहले ही अरबों डॉलर का नुक़सान ज़ाहिर कर चुकी हैं जिसकी वजह से क़र्ज़ का बाज़ार बिल्कुल ठप हो गया है. ऐसे माहौल में आम लोगों और कारोबारी इकाइयों के लिए क़र्ज़ लेना मुश्किल हो जाता है क्योंकि क़र्ज़ देने के लिए बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के पास धन ही नहीं होता है.