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शेयर बाज़ार ने लगाया गहरा गोता

भारत के तीस प्रमुख शेयरों का सूचकांक शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ 16 हज़ार के आंकड़े से नीचे जाकर बंद हुआ है.

शुक्रवार को सेंसेक्स के आंकड़े में 3.6 प्रतिशत की कमी आई और दिन भर के कारोबार में सूचकांक 566 अंक गिरकर 15,975 पर बंद हुआ.

अमरीका में मंदी की आशंका, भारत में मुद्रास्फीति में तेज़ी और वामपंथी दलों की ताज़ा धमकी को इस गिरावट का कारण माना जा रहा है.

शेयर बाज़ार के विश्लेषक अशोक अग्रवाल कहते हैं, "इसमें कुछ भी नया नहीं है, सब वही पुरानी बातें हैं, अमरीकी अर्थव्यस्था की कमज़ोरी के परिणाम दिख रहे हैं."

रियल स्टेट, ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों पर सबसे अधिक मार पड़ी है. रिलायंस एनर्जी, बजाज ऑटो, एल एंड टी जैसी कंपनियों के शेयरों की क़ीमतें छह से 13 प्रतिशत तक गिरी हैं.

भारत ही नहीं, पूर्वी एशियाई देशों के शेयर बाज़ारों में 1.5 से लेकर 3.5 प्रतिशत की कमी देखी गई.

बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि पाँच प्रतिशत से ऊपर की ओर बढ़ रही मुद्रास्फीति की दर और उसके ऊपर से वामपंथी दलों की परमाणु समझौते को लेकर सरकार को दी गई धमकी अपना असर दिखा रही है.

जानकारों का कहना है कि बाज़ार की हालत तभी सुधरेगी जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात बेहतर होंगे और विदेशी संस्थागत निवेशक अगले वित्त वर्ष के लिए अपने फंड एलोकेट करेंगे.