शुक्रवार, 29 फ़रवरी, 2008 को 09:02 GMT तक के समाचार
भारत में पहली बार रक्षा बजट का आँकड़ा एक लाख करोड़ के पार पहुँच गया है.
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने वर्ष 2008-09 के लिए रक्षा बजट में दस फ़ीसदी की बढ़ोतरी की.
इस बार रक्षा बजट एक लाख पाँच हज़ार 600 करोड़ रूपए का है. पिछले साल यह आँकड़ा 96 हज़ार करोड़ रूपए का था.
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, "मैं रक्षा मंत्री को भरोसा दिलाता हूँ कि इसके अलावा भी सेना की जो ज़रूरतें होंगी उसे हम पूरा करेंगे."
माना जा रहा है कि बजट में हुई वृद्धि से सैन्य आधुनिकीकरण को बल मिलेगा.
रक्षा बजट ऐसे समय एक लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है जब सेना, नौसेना और वायु सेना के पास सैन्य साजो-सामान की ख़रीदारी की लंबी फ़ेहरिस्त है.
सेना को आठ हज़ार करोड़ रुपए की लागत से टैंक, 12 हज़ार करोड़ रुपए की लागत से तोपें और करीब एक अरब डॉलर की लागत से हेलीकॉप्टर खरीदने हैं.
सैनिक स्कूलों पर ध्यान
रक्षा बजट में पिछले पांच वर्षो से आठ से दस हज़ार करोड़ रुपए की सालाना वृद्धि की जाती रही है. इस बार यह वृद्धि नौ हज़ार छह सौ करोड़ रुपए का है.
वर्ष 2006-07 का रक्षा बजट 89 हज़ार करोड़ रुपए का था जिसमें से तीन हज़ार करोड़ रुपए की राशि रक्षा मंत्रालय खर्च नहीं कर पाया था.
कभी 2001-02 के रक्षा बजट में 65 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान था. इस तरह उसमें अब तक चालीस हज़ार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है.
वित्त मंत्री ने सैनिक स्कूलों की दशा पर भी ध्यान दिया है जो सैन्य बलों के लिए अधिकारियों की नर्सरी के तौर पर जाने जाते हैं.
देश के 22 सैन्य स्कूलों की दशा सुधारने और उनकी ढांचागत सुविधाओं में सुधार के लिए दो-दो करोड़ रुपए की राशि तय की गई है. इस तरह
सैनिक स्कूलों के सुधार पर 44 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे.