शुक्रवार, 29 फ़रवरी, 2008 को 08:05 GMT तक के समाचार
अशोक चक्रधर
जाने माने व्यंग्यकार
कपूर आंटी ने टेलीविज़न के ऊपर कुछ फूल रखे, उनके बीच में एक नारियल खड़ा करके फंसा दिया.
नारियल के ऊपर छोटा सा काला कपड़ा रखा और उस नारियल को कपूर साहब का एक टूटा चश्मा पहना दिया, साइड में अगरबत्ती जला दी.
कपूर साहब ने शांत जिज्ञासा रखी- 'आज शुक्रवार को तुम संतोषी माता का व्रत रखती हो ये किसकी पूजा हो रही है?'
कपूर आंटी ने सर पर पल्लू लिया और बोलीं आज मैंने असंतोषी भैया का व्रत भी रखा है, ये मेरे भैया चिदंबरम स्वामी हैं.
आज अपना पांचवां आम बजट पेश कर रहे हैं, दिल पहले ही धड़का दिया है कि महंगाई सातवें आसमान तक जा सकती है, चलो, सबको बुला लो, आरती करते हैं.'
थाली में फूल, दीपक में बाती, घंटी में टन-टन और शुरू हुई आरती.
उधर चिदंबरम ने अपनी कत्थई अटैची से सफेद कागज़ों का पुलिंदा निकाला, इधर पूरे कुनबे के साथ पड़ोसियों ने आरती गाना शुरू कर दिया
चिदंबरम स्वामी!
बजट में नामी तुम्हें परनामी!!
इससे लेना उससे लेना, कुछ भी कर देना,
मेरे घर का बजट किंतु तुम मत बिगाड़ देना,
नहीं झेल पाऊंगी घर में अपनी नाकामी
चिदंबरम स्वामी...
चिदंबरम स्वामी एक के बाद एक पन्ना पलटते जा रहे थे.
सबकी समझ में सारी बातें नहीं आ रही थीं. कुनबे और पड़ोस का हर उम्र का सदस्य अपने लिए सुविधाएं चाहता था.
उन्हें क्या मतलब की चिदंबरम स्वामी 11वीं योजना में नौ प्रतिशत विकास की दर हासिल करेंगे या पौने नौ की, उन्हें तो महंगाई और मंदी का ख़तरा सता रहा था.
स्वामी कह चुके थे कि ‘मैं सतर्कतापूर्ण निगरानी के साथ आशावान हूँ.'
कपूर आंटी बड़बड़ाईं- घर की निगरानी मैं करती हूं, सतर्कता से मैं घर का बजट बनाती हूं, पर महंगाई बढ़ा दी तो आशावान कैसे रहूंगी चिदंबरम स्वामी? मेरी आशाओं पर पानी फेरा तो इस नारियल पर कपूर साहब का चश्मा फोड़ दूंगी.'
इधर कपूर साहब ने कपूर आंटी को चुप किया, उधर हंगामा करते हुए सांसदों पर सोमनाथ चटर्जी चीख रहे थे- प्लीज़ टेक योर सीट, नथिंग विल भी रिकार्डिड. ऑनली चिदंबरम.'
दोनों तरफ सन्नाटा सा छा गया. उधर चिदंबरम ने अंग्रेज़ी में बोलना शुरू किया, इधर कपूर आंटी फिर से बोल उठीं— 'हाय-हाय तुमसे तो हमारा लालू ही ठीक था, जो बोल रहा था समझ में तो आता था. ये इतने पॉइंट इतने और उतने पॉइंट उतने क्या समझ में आएंगे?'
कपूर साहब सोमनाथ चटर्जी की तरह बोले—'चुप करो, सुनने भी दो. वो कह रहे हैं फूड आर्टिकल्स की सप्लाई में दिक्कत आएगी.'
इतना सुनते ही कपूर आंटी को मूर्छा आने लगी- 'हाय-हाय जिसका डर था वही होने वाला है. टीवी को म्यूट कर करो चलो आरती गाओ.
बजट तुम्हारा हाय न लाए ज़्यादा महंगाई
ऐसा ना हो हम ये सोचें आरति क्यों गाई
खुश होंगे वे ही जन जिनके चेहरे बादामी
चिदंबरम स्वामी
बजट में नामी तुम्हें परनामी
कपूर आंटी की आंखों से आंसू गिरने लगे. सप्लाई करने वालों की चाँदी होगी और हमारी बरबादी.
ऐसा न करना चिदंबरम स्वामी. कपूर साहब ने टीवी का वॉल्यूम बढ़ाया, हंगामे और तालियों के बीच चिदंबरम स्वामी भारत निर्माण, सर्व शिक्षा अभियान के लिए हज़ारों करोड़ रुपया बांट रहे थे.
रक्षा बजट में दस प्रतिशत का इजाफ़ा, पर हमें युद्ध-वुद्ध से क्या?
कस्टम ड्यूटी घटाई, दूध सस्ता किया, बहुत अच्छे! आईटी और हाईटी दोनों का ख्याल रखा, वैरी गुड.
जवाहर नवोदय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के दरवाज़े फोकट में ग़रीबों, दलितों के लिए खोले ये तो अच्छी बात करी स्वामी.
कुनबे के नौजवान खुश हो गए. मिड-डे मील का इंतज़ाम भी ठीक है. कपूर साहब ने बीच में चिदंबरम को टंगड़ी मारी-
बच्चों के मिड मील का कीन्हा बंदोबदस्त
मिडल मैन खाएं नहीं मिड डे मील समस्त
'राष्ट्रीय वृद्ध जन कार्यक्रम' की घोषणा हुई तो दादा जी खुश हुए. 'नेशनल नॉलेज नेटवर्क' की बात हुई तो मिंटू खुश हुआ.
'ग्रामीण सहायता मिशन' का ज़िक्र हुआ तो कामवाली बाई पुष्पा खुश हुई. कपूर आंटी का देवर टैक्स की छूटों का हिसाब लगाकर खुश हुआ.
पड़ोस के मित्तल साहब सर्विस टैक्स के प्रस्तावों से न खुश थे न नाख़ुश. कुनबे के लोग और अड़ोसी-पड़ोसी सबके चेहरे पर लगभग किस्म का सुकून था.
अगर खून था तो कपूर आंटी की आंखों में. हाय-हाय महंगाई से तो पल्ला झाड़ लिया तूने स्वामी. काले धन पर कोई अंकुश नहीं है, हमारी मेहनत की सफेद कमाई पर डाका डालोगे महंगाई बढ़ाकर.
स्वामी के काले बाल और सफेद कपड़े देखकर कपूर आंटी ने टीवी बंद कर दिया. टप-टप आंसू बहाने लगीं और अकेले ही आरती गाने लगीं.
काले धन को छोड़, श्वेत धन पर डाका डाला
समझ न आता अभी जपें कैसे तुम्हरी माला
सबको खुश करने का चक्कर बड़ा तामझामी
उद्योगों को उच्च वर्ग को नाखुश नहीं किया
पिछड़े वर्गों पर तुमने कुछ-कुछ ध्यान दिया
है गरीब के लिए नहीं यह बहुत इंतज़ामी
चिदंबरम स्वामी! बजट में नामी!! तुम्हें परनामी!!!
अचानक कपूर साहब ने नारियल से चश्मा उतार लिया और उसके टूटे कांच के थ्रू कुनबे और पड़ौसियों को देखने लगे.