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गुरुवार, 28 फ़रवरी, 2008 को 02:44 GMT तक के समाचार

'विकास दर प्रभावित होने की आशंका'

भारतीय संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में बुनियादी संरचना मज़बूत करने में आ रही अड़चनों और महँगाई को विकास दर में बाधक बताया गया है.

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है, "पिछली तिमाही में विकास दर इससे पहले के दो वर्षों की तुलना में सबसे कम रहा है."

आम लोगों की ज़रूरतों के सामान के दाम बढ़ने पर इसमें चिंता जताई गई है और अगले कुछ समय में महँगाई दर और बढ़ने की आशंका भी जताई गई है.

सरकार ने ये भी स्वीकार किया है कि महँगाई बढ़ने से आम आदमी पर बोझ बढ़ रहा है.

आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर 8.7 फ़ीसदी रहने की संभावना जताई गई है जो यूपीए सरकार के नौ फ़ीसदी के निर्धारित लक्ष्य से कम है.

हालाँकि सर्वेक्षण पेश करन के बाद वित्त मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में भरोसा जताया कि ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में नौ फ़ीसदी विकास दर हासिल कर लिया जाएगा.

उनका कहना था, "घरेलू निवेश और बचत को देखते हुए हमें पूरी उम्मीद है कि हम नौ फ़ीसदी विकास दर के लक्ष्य को हासिल करेंगे. हम इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए संसाधन जुटाने में कामयाब होंगे."

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के संशोधित अनुमान के अनुसार वर्ष 2006-07 में आर्थिक विकास दर 9.6 प्रतिशत थी.

दिसंबर 2007 के मासिक आँकड़ों के मुताबिक मैनुफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर 13 फ़ीसदी से घट कर लगभग दस फ़ीसदी रह गई है.

आर्थिक सर्वेक्षण में इस तरह की सुस्ती के कारणों का ज़िक्र किया गया है.

महंगाई बढ़ने का ख़तरा भी बना हुआ है जो चार फ़ीसदी के पार पहुँच चुका है.

सुधारों की ज़रूरत

सर्वेक्षण कहता है, "विकास दर दस फ़ीसदी या इससे अधिक करने के लिए आर्थिक सुधारों की ज़रूरत है. कृषि पर ध्यान देना पड़ेगा और अन्य ज़रूरी उपाय करने होंगे."

ग़ौरतलब है कि सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दल विनिवेश और श्रम कानूनों में बदलाव जैसे मुद्दों पर दबाव बनाते रहे हैं.

सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि उर्वरक, दवा और चीनी क्षेत्र को विनियामक बाधाओं से स्वतंत्र किया जाए.

सर्वेक्षण में वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाए संकट के मद्देनज़र घरेलू अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभावों का ज़िक्र किया गया.

ख़ास कर डॉलर के मुक़ाबले रूपए में आई मज़बूती से निर्यात पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.

सरकार ने स्वीकार किया है कि अमरीका और यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात में कमी आई है जिसका अध्ययन करने की ज़रूरत है.