मंगलवार, 26 फ़रवरी, 2008 को 12:01 GMT तक के समाचार
आम जनता ने जहाँ रेल बजट का स्वागत किया है वहीं विपक्षी नेताओं ने इसे निराशाजनक बताते हुए इसमें अनेक कमियाँ बताईं हैं.
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा, " यह बजट एक दिखावा भर है. इसमें रेलवे की कई सच्चाइयों को छिपाया गया है. इस बजट में भाजपा शासित राज्यों के साथ जानबूझ कर पक्षपात किया गया है."
उन्होंने कहा, " देश की आबादी का 50 फ़ीसदी महिलाएं हैं लेकिन उन्हें मात्र पाँच फ़ीसदी आरक्षण दिया गया है. इससे महिलाओं का कुछ भला नहीं होगा. इसके अलावा महिलाओं को रेलवे सुरक्षा बलों में आरक्षण की घोषणा भी सिर्फ़ छलावा है."
सीपीआई नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि रेल बजट देखने के बाद लग रहा था कि इसे रेल मंत्रालय ने नहीं बल्कि वित्त मंत्रालय ने बनाया है.
उन्होंने कहा, " हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई के लोकल यात्रियों के लिए इसमें कोई सुविधा नहीं दी गई है."
उनके अनुसार, " इसके अलावा रेलवे में एक लाख सीटें खाली पड़ी हैं जिन पर नियुक्ति के लिए कोई घोषणा नहीं की गई है. इसलिए सीपीआई इस रेल बजट का विरोध करती है."
'चुनावी बजट'
समाजवादी पार्टी के नेता मोहन सिंह का कहना था, " यूपीए की ट्रेन तो चुनाव से पहले ही गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गई."
उन्होंने कहा कि इस बजट ने रेलवे के निजीकरण के दरवाज़े खोल दिए हैं. यह बजट ठेका प्रथा को बढ़ावा देता है.
शिव सेना नेता मनोहर जोशी ने कहा, " हमने केवल एक ही माँग रखी थी जो मुंबई के लिए ज़रूरी थी कि मुंबई की लोकल ट्रेनों का ध्यान रखा जाए लेकिन मुंबई और दूसरे मेट्रो शहरों की लोकल ट्रेनों के लिए कुछ नहीं किया गया."
उन्होंने कहा कि यह चुनाव को ध्यान में रख कर बनाया गया बजट है जो बहुत वायदे तो करता है लेकिन देता कुछ नहीं है.
भाजपा नेता विजय कुमार मलहोत्रा का कहना था कि लोकसभा से सांसदों के बहिष्कार ने ही लालू प्रसाद के रेल बजट के खोखलेपन को जता दिया है.
गुजरात से भाजपा सांसद हरेन पाठक ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि पश्चिम रेलवे रेल सेवा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. लेकिन इसके बावजूद गुजरात के लिए रेल बजट में कोई सुविधा नहीं दी गई है.
राबड़ी देवी ने कहा कि लालू ने जो यात्री भाड़े में कमी की है, वो बहुत अच्छा काम है.