मंगलवार, 26 फ़रवरी, 2008 को 12:48 GMT तक के समाचार
रेल मंत्री के रूप में लालू प्रसाद ने अपना पाँचवा बजट पेश किया है, हर बार की तरह इस बार भी अपने बजट भाषण में उन्होंने चिरपरिचित अंदाज़ में शेरो-शायरी के साथ अपनी सफलताओं का बखान किया.
उनके 56 पेज के बजट भाषण के सभी अशार शब्दशः यहाँ पेश किए जा रहे हैं.
रेलवे को हुए मुनाफ़े के बारे में
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सब कह रहे हैं, हमने गज़ब काम किया है,
करोड़ों का मुनाफ़ा हर एक शाम दिया है.
सुविधाओं में सुधार पर
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फल सालों ये अब देगा, पौधा जो लगाया है,
सेवा का, समर्पण का, हर फ़र्ज़ निभाया है.
राजनीतिक टिप्पणी
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उजड़ा चमन जो छोड़ गए थे हमारे दोस्त
अब बात कर रहे हैं वो फ़सले बहार की.
निवेश के मामले में
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नई कथनी, नई करनी, नई एक सोच लाए हैं
तरक्की की नई पारसमणि हम खोज लाए हैं.
लाभांश पर
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गोल पर गोल दाग रहे हैं, हर मैच में
देश का बच्चा बच्चा बोले चक दे रेलवे.
नई योजनाओं पर
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लेकर चला हूँ सबको तरक्की की राह पर
एक नींव साझीदारी की मैंने रखी नई.
कुलियों को नौकरी देने के बारे में
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मुसाफिर और कुली का साथ बरसों से निरंतर है
उसे सम्मान दें, जो रात दिन सेवा में तत्पर है.
कर्मचारी कल्याण
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समर्पित जिसका जीवन राष्ट्र सेवा में हमेशा है,
कड़ी मेहनत करे जो, वो सिपाही रेलकर्मी है.
रेलवे की चमत्कारी सफलता पर
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जादू औ टोना हमने दिखाया था पिछले साल
इस बार पूरा इंद्रजाल देख लीजिए.
आभार
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मैं नतमस्तक हूँ सबका, शुक्रिया भी हूँ अदा करता,
मेरी कोशिश में शामिल हैं सभी, और कामयाबी में.