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सोमवार, 28 जनवरी, 2008 को 10:52 GMT तक के समाचार

शेयर बाज़ारों में फिर गिरावट

अमरीकी अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका को देखते हुए एशियाई शेयर बाज़ारों में एक बार फिर गिरावट आई है.

भारत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक 208 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ.

बीएसई सूचकांक 1.14 फ़ीसदी की गिरावट के साथ 18,152.78 पर बंद हुआ. दिन में कारोबार के दौरान एक समय सूचकांक 17443 के स्तर तक पहुँच गया था.

उधर निफ़्टी में भी 2.2 फ़ीसदी की गिरावट आई. निफ़्टी 116 अंक लुढ़का और 5266 के स्तर पर बंद हुआ.

शुक्रवार को अमरीकी शेयर बाज़ारों में गिरावट आई थी और जब सोमवार को एशियाई बाज़ार खुले तो उसका असर स्पष्ट दिखाई दिया.

जापान के मुख्य शेयर सूचकांक निक्केई में चार फ़ीसदी और हॉंगकॉंग के हैंगसैंग में 4.3 फ़ीसदी से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई.

विश्लेषकों का कहना है कि सबकी निगाहें अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व की बैठक पर टिकी हुई है.

संभावना जताई जा रही है कि फ़ेडरल रिज़र्व बुधवार को एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती कर सकता है.

ऊतार-चढ़ाव

पिछले हफ़्ते अमरीकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज़ दरों में अचानक 0.75 फ़ीसदी की भारी कटौती की थी जिससे दुनिया भर के शेयर बाज़ारों को संभलने में मदद मिली.

इधर भारतीय रिज़र्व बैंक की भी मंगलवार को बैठक है जिसमें ब्याज दरों पर फ़ैसला लिया जा सकता है.

ग़ौरतलब है कि पिछले लगभग दो वर्षों से रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती नहीं की है.

भारतीय शेयर बाज़ारों के लिए पिछला हफ़्ता भारी ऊतार-चढ़ाव भरा रहा और जानकारों की राय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में मज़बूती के कोई ठोस संकेत नहीं मिलने तक यह सिलसिला जारी रह सकता है.

शुरुआत 21 जनवरी को हुई जब बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में दस फ़ीसदी तक की गिरावट आई.

यही हाल 22 जनवरी को रहा और सेंसेक्स एक समय 17 हज़ार अंकों से भी नीचे आ गया.

गिरावट का दौर शुरु होने से पहले सेंसेक्स 22 हज़ार के आँकड़े के पास पहुँच चुका था. इस तरह चंद कारोबारी दिनों में हज़ारों अंकों की घट-बढ़ देखी गई.