शनिवार, 26 जनवरी, 2008 को 01:22 GMT तक के समाचार
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि विकास दर के बजाए महँगाई को क़ाबू में रखना ज़्यादा महत्वपूर्ण है. महँगाई दर में लगातार दूसरे हफ़्ते वृद्धि हुई है.
दावोस में विश्व आर्थिक मंच में हिस्सा ले रहे पी चिदंबरम का कहना है कि उच्च विकास दर मुक़ाबले महँगाई की दर को कम रखना सरकार की प्राथमिकता है.
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर आर्थिक विकास दर (जीडीपी) और महँगाई दर दोनों बढ़ जाएँ तो उन्हें परेशानी होगी.
उनका कहना था, "अगर विकास दर कम होकर आठ या साढ़े आठ फ़ीसदी भी रह जाए तो मुझे परेशानी नहीं होगी, लेकिन इस साल मुद्रास्फ़ीति की दर छह फ़ीसदी पहुंच जाए तो मुझे बड़ी परेशानी होगी."
वित्त मंत्री की नज़र में अगर मुदास्फ़ीति दर चार फ़ीसदी से नीचे हो और आर्थिक विकास दर आठ फ़ीसदी से ऊपर रहे तो सरकार के लिए यह राहत की बात होगी.
सरकार ने वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान जीडीपी दर 8.5 फ़ीसदी रहने का अनुमान जताया है.
वित्त मंत्री ने माना कि अमरीकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती छाई रही तो भारत के निर्यातों पर आंशिक असर पड़ सकता है.
महँगाई दर
वाणिज्य मंत्रालय ने जो ताज़ा आँकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक 12 जनवरी को समाप्त हुए हफ़्ते में महँगाई की दर बढ़ कर 3.83 प्रतिशत हो गई.
मुद्रास्फ़ीति में लगातार दूसरे हफ़्ते बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. यह वृद्धि निर्मित सामानों और कुछ खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने के कारण हुई है.
हाल के दिनों में मक्का, चावल, आयातित खाद्य तेल, चीनी और नारियल तेल की क़ीमतें बढ़ी हैं.
महँगाई दर बढ़ने के बावजूद यह भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमानों से अधिक नहीं है. रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फ़ीति दर पाँच फ़ीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है.