गुरुवार, 24 जनवरी, 2008 को 15:04 GMT तक के समाचार
इंदुशेखर सिन्हा
बीबीसी संवाददाता, लंदन
भारत के पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने भारत में तेल की क़ीमतों के बढाए जाने के संकेत दिए हैं.
अगले सप्ताह ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक होने जा रही है. माना जा रहा है कि उस बैठक में ये फैसला ले लिया जाएगा.
लंदन के दौरे पर आए पेट्रोलियम मंत्री ने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा, "तेल की क़ीमतो के बढने की वजह से इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों को बहुत नुक़सान उठाना पड़ रहा है. आने वाले सप्ताह में मंत्रियों की बैठक कर फैसला ले लिया जाएगा."
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में अगले सप्ताह होने वाली इस बैठक में तेल की क़ीमतों को बढ़ाने के साथ-साथ आयात शुल्क और उत्पाद शुल्क को घटाने के विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की क़ीमतों में एक बड़ा उछाल आया है और ये अभी लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल है लेकिन भारत में उसके अनुरुप क़ीमतें नहीं बढाई गईं हैं और तेल आयात कर रहीं कंपनियों को घाटा उठाना पड़ रहा है.
सरकार पिछले कुछ महीनों से रसोई गैस, किरासन तेल, डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतों में बढ़ोतरी को टालती रही है लेकिन बढ़ते घाटे के साथ उस पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तेल की क़ीमतें पहले ही बढ़ा दी गई होंती लेकिन गुजरात और हिमाचल विधानसभा के चुनाव को देखते हुए इसे टाल दिया गया था.
भारी घाटा
एक अनुमान के अनुसार इसी वित्तीय वर्ष में ये घाटा क़रीब सात खरब रुपये (साढ़े 17 अरब अमरीकी डॉलर) का हो गया है.
अपनी तेल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भारत को अपनी खपत का क़रीब अस्सी प्रतिशत तेल आयात करना पड़ता है यानी मोटे तौर पर अगर आपने पाँच लीटर तेल ख़रीदा तो उसमें से लगभग चार लीटर तेल आयतित होगा.
ज़ाहिर है ऐसे में विश्व स्तर पर तेल की बढ़ती क़ीमतों का असर भारत पर भी पड़ रहा है.
लंदन आए भारत के तेल मंत्री मुरली देवड़ा ने विदेशी कंपनियों के लिए भारत में तेल निकालने के अवसरों को भी गिनाते हुए कहा कि भारत में तेल का एक बड़ा बाज़ार है.
भारत में अभी केवल 21 प्रतिशत तेल कुँओं का ही पूरी तरह से लाभ उठाया जा सका है और सरकार इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को लुभाने की कोशिश कर रही है.