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गुरुवार, 24 जनवरी, 2008 को 12:41 GMT तक के समाचार

सात अरब डॉलर का 'महाघोटाला'

फ्रांस के बैंक सोसिएते जेनराल का कहना है कि उसे एक बहुत बड़े घोटाले का पता चला है, पेरिस में रहने वाले एक कारोबारी के घपलों की वजह से बैंक को सात अरब डॉलर से अधिक का नुक़सान हुआ है.

इसे दुनिया का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला माना जा रहा है और यह ऐसे समय पर सामने आया है कि जबकि विश्व भर में आर्थिक मंदी की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं.

बैंक का कहना है कि रोज़मर्रा के लेन-देन के ज़रिए ही यह घोटाला हुआ है जिसे बहुत ही "चालाकी से छिपाया गया था".

इस ख़बर के सामने आने के बाद बैंक के शेयर की क़ीमतों में तेज़ गिरावट आई और उसकी क़ीमत में पिछले कुछ महीनों में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है.

सोसिएते जेनराल फ्रांस के सबसे बड़े बैंकों में से एक है अब बैंक को अपना घाटा पूरा करने के लिए सात अरब डॉलर की रक़म जुटानी होगी.

बैंक ने अपने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि इस घोटाले के बावजूद वर्ष 2007-8 के कारोबार से बैंक को 60 से 80 करोड़ यूरो तक का फ़ायदा ही होगा.

बैंक का कहना है कि "एक कारोबारी ने अपनी सीमा से बहुत अधिक रक़म का ग़लत तरीक़े से लेनदेन किया है जिसकी वजह से यह घाटा हुआ है, इस व्यक्ति को बैंक की कार्यप्रणाली के बारे में गहरी जानकारी थी क्योंकि वह बैंक में काम कर चुका था."

बैंक ने अपने ग्राहकों को एक पत्र लिखकर बताया है कि यह घोटाला इतनी सफ़ाई से किया गया कि बैंक को लंबे समय तक पता ही नहीं चला.

बैंक का कहना है कि व्यापारी ने घोटाला करने की बात स्वीकार कर ली है और उसका खाता बंद कर दिया गया है. बैंक के मैनेजरों को भी नौकरी से हटा दिया गया है.

बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "मुझे बहुत अफ़सोस है कि एक व्यापारी ने गुपचुप सौदे करके बैंक को इतना बड़ा झटका दिया लेकिन हमें पता भी नहीं चला."

इस घोटाले के बाद बैंक के चेयरमैन ने इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी लेकिन बैंक के निदेशक मंडल ने उसे नामंज़ूर कर दिया.