शनिवार, 12 जनवरी, 2008 को 06:07 GMT तक के समाचार
भारतीय उद्योगों और व्यापार की संस्था एसोचैम का कहना है कि टाटा की छोटी कार नैनो के बाज़ार में आने से भारत में दुपहिया वाहनों की क़ीमतों में 20 फ़ीसदी की कमी हो सकती है.
संस्था का कहना है कि इससे पुरानी कारों की क़ीमतों में भी 35 प्रतिशत की कमी होने की संभावना है.
उल्लेखनीय है कि 10 जनवरी को टाटा मोटर्स ने एक लाख रुपए वाली कार नैनो पेश कर दी है और अनुमान है कि इस साल दीवाली तक यह बाज़ार में आ जाएगी.
इस कार का पूरी दुनिया में स्वागत किया जा रहा है.
नैनो के पेश होने के बाद एसोचैम ने कोई 250 कंपनियों के कार्यकारी अधिकारियों के बीच एक सर्वेक्षण किया है.
इस सर्वेक्षण के आधार पर संस्था ने कहा है, "टाटा नैनो के आने से दुपहिया वाहनों की क़ीमतों में 20 फ़ीसदी की कमी होने के आसार हैं."
असर
एसोचैम के अनुसार ज़्यादातर कार्यकारी अधिकारियों ने कहा है कि टाटा नैनो भारतीय बाज़ार में दुपहिया वाहनों को कड़ी चुनौती देने जा रही है और इससे दुपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों को तकनीक में सुधार के कदम उठाने के लिए भी बाध्य होना पड़ेगा.
उल्लेखनीय है कि पिछले एक साल में दुपहिया वाहनों का बाज़ार वैसे भी धीमा पड़ गया है. पिछले एक साल में 15.50 लाख वाहनों की बिक्री हुई है जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 19 लाख तक पहुँच गया था.
एसोचैम ने कार्यकारी अधिकारियों से हुई बातचीत के आधार पर कहा है कि दुपहिया वाहन निर्माताओं को अब ज़्यादा शक्तिशाली इंजन वाली मोटरसाइकिलें बनाने के बारे में भी सोचना होगा क्योंकि ज़्यादा क़ीमत की वजह से ग्राहक इसे लेने के इच्छुक नहीं होंगे.
चेंबर के अध्यक्ष वेणुगोपाल एन धूत का कहना है, "नैनो कार के आने के बाद संभावना है कि बैंकों से कार के लिए कर्ज़ लेने वालों की संख्या में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो जाए क्योंकि कई और कंपनियों ने छोटी कारें बनाने का फ़ैसला किया है."
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 70 फ़ीसदी कार्यकारी अधिकारियों ने कहा कि आने वाले 3-4 सालों में टाटा की नैनो कार छोटी कारों के बाज़ार का 50 फ़ीसदी हिस्से पर काबिज हो जाएगी.