सोमवार, 17 दिसंबर, 2007 को 11:55 GMT तक के समाचार
भारी बिकवाली के दबाव में भारतीय शेयर बाज़ारों में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई.
सेंसेक्स जहाँ 769 अंक लुढ़क गया, वहीं निफ़्टी ने भी 270 अंक का गोता लगाया.
अमरीका में मुद्रास्फीति में बढ़ोत्तरी से ख़रीद क्षमता में कमी और निवेश में कटौती की आशंका से भारतीय बाज़ार भी दिन भर सहमे रहे.
निवेशकों को डर था कि अमरीका में ब्याज दरों में कटौती का असर सीधे भारतीय कंपनियों पर होगा और धातु और तेल के शेयरों में भारी गिरावट आएगी.
गिरावट
भारतीय शेयर बाज़ार में पिछले चार महीनों में यह सबसे बड़ी गिरावट है.
बम्बई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 769.48 अंक की गिरावट के साथ 19261.35 अंक पर बंद हुआ.
सेंसेक्स की रफ़्तार तय करने वाले इन 30 कंपनियों में से पाँच के शेयर पाँच फ़ीसदी से भी अधिक गिरे.
सत्र के दौरान कुल मिलाकर 153 करोड़ 80 लाख रुपए का कारोबार हुआ.
कारोबार के दौरान तेल, गैस और धातु कंपनियों के शेयरों में नरमी रही और सेंसेक्स के गिरने की यह सबसे बड़ी वजह रही.
सेंसेक्स पिछले सप्ताह ही गुरुवार को 20498.11 की ऊँचाई पर पहुँचा था. अगर साल की शुरुआत से देखें तो सेंसेक्स में यह 40 फ़ीसदी उछाल थी.
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ़्टी में भी इसके इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 270 अंक फिसलकर 5777 अंक पर बंद हुआ.
पिछले कारोबारी सप्ताह के आख़िरी दिन निफ्टी 6047.70 अंक पर बंद हुआ था.