गुरुवार, 01 नवंबर, 2007 को 06:32 GMT तक के समाचार
तेल की क़ीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं और न्यूयॉर्क के बाज़ार में इसकी क़ीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के क़रीब तक जा पहुँची है.
ऐसा लगातार दूसरे हफ़्ते हो रहा है.
वैसे 15 दिनों पहले तेल की क़ीमत 88 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची थी.
बुधवार को अमरीकी बाज़ार में कच्चे तेल का भाव 4.15 डॉलर बढ़कर 94.53 पर बंद हुआ जबकि लंदन में 3.19 डॉलर की बढ़ोत्तरी के साथ यह 90.63 डॉलर पर बंद हुआ.
अमरीकी सरकार के आँकड़े बताते हैं कि कच्चे तेल का स्टॉक पिछले हफ़्ते 39 लाख बैरल तक कम हो गया था.
जबकि विश्लेषकों ने कहा था कि बाज़ार में एक लाख बैरल की बढ़ोत्तरी होगी.
अमरीका तेल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इसलिए वहाँ चिंता सबसे अधिक है.
बुधवार को तेल की क़ीमतों में चार से पाँच डॉलर की वृद्धि हुई जो बड़ा उलटफेर है.
कई कारण
तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के कई कारण रहे हैं.
इसका एक बड़ा कारण डॉलर का क़ीमत अमरीका से बाहर कम होना है.
बुधवार को पाउंड की तुलना में डॉलर 1981 के बाद से अब तक के सबसे नीचे के स्तर पर चला गया.
दूसरी ओर तेल के निवेशक तुर्की की उस चेतावनी पर नज़र लगाए हुए हैं जिसमें उसने इराक़ में कुर्दों पर बड़ी सैन्य कार्रवाई करने की बात कही है.
पिछले महीनों में नाइजीरिया के तेल उत्पादक क्षेत्रों में हिंसा को लेकर भी चिंता रही है.
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ ईरान के परमाणु विवाद के न सुलझने से भी अमरीका में तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है.
उधर मैक्सिको के तटीय इलाक़ों में आए तूफ़ान की वजह से इसे अपने तेल उत्पादन में कोई 20 प्रतिशत की कटौती करनी पड़ी है.
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस साल के अंत तक तेल की क़ीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है.