गुरुवार, 25 अक्तूबर, 2007 को 07:16 GMT तक के समाचार
ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
पिछले दिनों भारतीय शेयर बाज़ार को लेकर पैदा हुई चिंताओं पर विचार करने के लिए शेयर बाज़ार की नियामक संस्था सेबी की मुंबई में अहम बैठक हो रही है.
माना जा रहा है कि इस बैठक में भारतीय शेयर बाज़ार में पैसा लगा रहे पार्टिसिपेटरी नोट्स की स्थिति और पारदर्शिता को लेकर कुछ अहम फैसले लिए जा सकते हैं.
पार्टिसिपेटरी नोट्स ऐसे निवेशक हैं जो विदेशी निवेश संस्थाओं के जरिए भारतीय बाज़ार में पैसा लगा रहे हैं और पिछले दिनों तब एक बार फिर चर्चा में आए जब इनके पैसा वापस निकाल लेने से शेयर बाज़ार में भारी गिरावट देखने को मिली.
पिछले सप्ताह भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) के विदेशी संस्थागत निवेशकों पर सख़्ती के संकेत के बाद सेंसेक्स में अबतक की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई थी.
इसके बाद वित्तमंत्री को बयान देकर निवेशकों से कहना पड़ा था कि उन्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है और विदेशी निवेश पर लगाम नहीं लगाई जाएगी. तब जाकर शेयर बाज़ार संभला था.
ग़ौरतलब है कि भारतीय शेयर बाज़ार में इस वर्ष हुए निवेश का एक बड़ा हिस्सा पार्टिसिपेटरी नोट्स का है.
संभावनाएँ
जानकार बताते हैं कि गुरुवार की बैठक में सेबी यह प्रस्ताव ला सकता है कि ऐसे पार्टीसिपेटरी निवेशकों पर 40प्रतिशत तक कैट लगाया जाना चाहिए.
साथ ही इस बात पर भी विचार किया जाना है कि ऐसे निवेशकों के बारे में कितनी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए.
क्या अभी तक निवेश करते आए पार्टीसिपेटरी नोट्स के नाम, पते संबंधी जानकारी सार्वजनिक की जाए और क्या नए निवेशकों को ऐसे नियमों में बाँधा जाए, इन मुद्दों पर भी बातचीत होनी है.
अर्थजगत के विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे निवेशकों के लिए पारदर्शिता तय करना बाज़ार के लिए तुरंत तो कुछ हलचल पैदा करने वाला भी हो सकता है पर दूरगामी परिणामों के बारे में सोचें तो यह फ़ायदेमंद होगा.
वहीं कुछ जानकार मानते हैं कि अब कोई कड़ा क़दम उठाने का असर बाज़ार पर शायद न ही पड़े क्योंकि जितनी हलचल होनी थी उतनी हो चुकी है और अब गंभीर निवेशक ही बाज़ार में बचे हैं.
माना जा रहा है कि गुरुवार की शाम तक सेबी की ओर से इस बारे में कोई बयान जारी किया जा सकता है.