गुरुवार, 11 अक्तूबर, 2007 को 10:30 GMT तक के समाचार
भारत में केंद्र सरकार ने इस साल पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें न बढ़ाने का फ़ैसला किया है.
साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की बढ़ती क़ीमतों से निपटने के लिए तेल के बांड जारी करने की भी घोषणा की है.
नई दिल्ली में कैबिनेट की बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने बताया, "हमने महत्वपूर्ण पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें न बढ़ाने का अपना वादा पूरा किया है."
माना जा रहा है कि पेट्रोल, डीज़ल, किरासन तेल और एलपीजी की क़ीमतें न बढ़ाने से सरकारी तेल कंपनियों को क़रीब 54, 935 करोड़ के राजस्व का नुक़सान हो सकता है.
लेकिन सरकार ने इससे निपटने के लिए 23,457.24 करोड़ रुपए के बांड जारी करने की घोषणा की है.
सब्सिडी
तेल के बांड जारी करने के अलावा सरकार ने एलपीजी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले किरासन तेल पर और तीन साल तक सब्सिडी देने की भी घोषणा की है जो एक अप्रैल 2007 से ही लागू होगा.
सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को 23,457.24 करोड़ रुपए के तेल बांड मिलेंगे.
इसमें से 11,800 करोड़ की पहली किश्त अगले हफ़्ते ही जारी कर दी जाएगी ताकि कंपनियाँ वर्ष 2007-08 की पहली छमाही में हुए नुक़सान से निपट सके.
कैबिनेट के फ़ैसले के बारे में जानकारी देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एलपीजी और किरासन तेल पर सब्सिडी देने का फ़ैसला किया गया.
कैबिनेट की बैठक से पहले इस सप्ताह के शुरू में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा और वित्त मंत्री पी चिदंबरम से भी मुलक़ात की थी और इस पर चर्चा की थी.