बुधवार, 10 अक्तूबर, 2007 को 16:56 GMT तक के समाचार
भारतीय रूपया डॉलर के मुक़ाबले नौ वर्षों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है.
बुधवार को मुद्रा बाज़ार में एक अमरीकी डॉलर की क़ीमत 39 रूपए 32 पैसे थी. भारतीय रूपए के विनिमय मूल्य में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
बताया जा रहा है कि भारतीय रुपए के मूल्य में बढ़ोत्तरी की वजह भारतीय शेयरों में बढ़ता विदेशी निवेश और औद्योगिक क्षेत्र में पूंजी निवेश है.
भारतीय मुद्रा के मूल्य में बढ़ोत्तरी को अर्थव्यवस्था की बेहतर सेहत के संकेत के रूप में तो देखा जा रहा है लेकिन कुछ विश्लेषक आगाह करते हैं कि इसकी वजह से निर्यातकों को नुक़सान उठाना पड़ सकता है.
डॉलर के मुक़ाबले रुपए के मज़बूत होने से अमरीकी कंपनियाँ भारत से निर्यात कम कर सकती हैं क्योंकि भारतीय उत्पाद उन्हें महँगे पड़ेंगे.
माना जा रहा है कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी की कंपनियों को इससे नुक़सान हो सकता है क्योंकि वे अमरीका को हर वर्ष करोड़ो डॉलर के सॉफ्टवेयर निर्यात करती हैं.
डॉलर के मुक़ाबले रूपए की क़ीमत ऐसे समय में बढ़ी है जबकि भारतीय शेयर बाज़ार में भारी उछाल दिख रहा है, मुंबई के तीस प्रमुख शेयरों का सूचकांक 18 हज़ार के आंकड़े को पार कर गया है.
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह दौर जारी रहेगा क्योंकि डॉलर अमरीकी अर्थव्यवस्था की कमज़ोरी के कारण और गिर सकता है.
अर्थशास्त्री रामउपेंद्र दास कहते हैं, "भारतीय अर्थव्यवस्था बुनियादी तौर पर बहुत मज़बूत है, अगर राजनीतिक अस्थिरता या भारी प्राकृतिक आपदा नहीं हुई तो यह चलन जारी रहेगा."
विदेशी मुद्रा के कारोबारियों का कहना है कि रिज़र्व बैंक ने रूपए की बढ़ती क़ीमत को नियंत्रण में रखने के लिए बुधवार को बड़े पैमाने पर अमरीकी मुद्रा ख़रीदी है.
रिज़र्व बैंक ने इस वर्ष अब तक 38 अरब डॉलर मूल्य की अमरीकी मुद्रा ख़रीदी है.