बुधवार, 19 सितंबर, 2007 को 03:38 GMT तक के समाचार
अमरीका के केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती के फ़ैसले के बाद भारतीय शेयर बाज़ार में भारी उछाल आया है और सेंसेक्स पहली बार 16 हज़ार के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया.
बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 15940 अंक पर खुला और सेंसेक्स के इतिहास में सबसे अधिक 653 अंकों की ज़बर्दस्त उछाल लेकर 16322 अंक के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ.
सेंसेक्स ने 15000 से 16000 के अंकों का फासला 52 कारोबारी दिनों में तय किया है.
सेंसेक्स की एक कारोबारी दिन में यह सबसे ज़्यादा उछाल है. इससे पहले 15 जून 2006 को सेंसेक्स में 615 अंकों का उछाल आया था.
विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि अमरीकी ब्याज दरों में कटौती का भारतीय शेयर बाज़ारों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को ब्याज दरों की कटौती की संभावना के कारण सेंसेक्स पिछले दो कारोबारी दिवसों की गिरावट से उबरने में कामयाब रहा था.
इस दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक में 165 अंक की बढ़त दर्ज की गई थी.
साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी 52 अंक चढ़ गया था.
ग़ौरतलब है कि मंगलवार को सेंसेक्स 15669 के स्तर पर बंद हुआ था.
ब्याज दरों में कटौती
इसके पहले अमरीका के केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती का फ़ैसला किया था.
इसकी वजह से अमरीकी और एशियाई बाज़ारों में तेज़ी देखी गई थी.
चार वर्षों में पहली बार फ़ेडरल रिजर्व ने ब्याज दर में कटौती की है.
फ़ेडरल बैंक ने ब्याज दर 5.25 फ़ीसदी से घटाकर 4.75 फ़ीसदी कर देने की घोषणा की है.
अमरीकी बैंक ने ब्याज दरों में आधे फ़ीसदी की कटौती की है जो उम्मीदों से कही अधिक मानी जा रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीकी गृह निर्माण क्षेत्र में भारी गिरावट को थामने के लिए ये क़दम उठाया गया है.
लेकिन ब्याज दरों में बढोत्तरी को लेकर चिंता भी जताई जा रही है कि इससे महंगाई बढ़ सकती है जो भविष्य में बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है.