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शनिवार, 25 अगस्त, 2007 को 07:10 GMT तक के समाचार

तेज़ी से बढ़ रही है शराब की खपत

भारत में शराब के शौकीनों की तादाद तेज़ी से बढ़ रही है. वर्ष 2010 तक देश में इसकी खपत 90 लाख़ लीटर सालाना होने की संभावना जताई गई है.

भारत के उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचेम का कहना है कि देश में शराब की सालाना वृद्धि दर लगभग 22 फ़ीसदी है और पूरी-पूरी संभावना है कि 2010 तक शराब की सालाना खपत मौजूदा 50 लाख़ लीटर से बढ़कर 90 लाख़ लीटर हो जाएगी.

शराब के शौकीनों में सबसे ज़्यादा बढ़ोत्तरी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और बंगलौर जैसे महानगरों में हो रही है.

सभी हैं शौकीन

एसोचेम के अध्यक्ष वेणुगोपाल एन धूत ने कहा, "ऐसा नहीं है कि शराब के शौकीन सिर्फ़ युवा ही हैं, बल्कि सभी आयु वर्गों के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है."

एक अध्ययन के अनुसार देश में हर साल लोग 25 करोड बीयर के 'केस' गटक जाते हैं. हर केस में बीयर की 12 बोतलें होती हैं.

इसके अलावा व्हिस्की के 7 करोड़ 20 लाख़ केस भी लोगों के हलक में उतर जाते हैं.

अभी लगभग हर 200 व्यक्तियों पर एक बोतल शराब की खपत होती है, लेकिन अगले तीन सालों में यह आंकड़ा काफ़ी बदल जाएगा.

धूत के अनुसार शराब की खपत में वृद्धि की कई वजहें हैं.

इनमें सबसे प्रमुख कारण ये है कि 2010 तक देश में 30 साल से कम उम्र के युवाओं की संख्या लगभग 65 करोड़ तक पहुँच जाएगी.

इसके अलावा शराब प्रति लोगों के व्यवहार और रुचि भी बदली है.

लोगों की खरीददारी की क्षमता में वृद्धि और उनका पश्चिमी जीवनशैली के प्रति बढ़ता झुकाव भी शराब की खपत में बढ़ोत्तरी की वजह है.

कारोबार

एसोचेम का कहना है कि सरकारी नीतियों के कारण भी शराब का व्यापार बढ़ा है.

कई राज्य सरकारों ने शराब पर शुल्क में कमी की है. साथ ही शराब बेचने की नीति भी उदार बनाई है.

सबसे अहम तथ्य ये है कि भारत में शराब उत्पादन के लिए फैक्ट्री लगाने की लागत भी बहुत ज़्यादा नहीं है.

एसोचेम के आकलन के अनुसार दस लाख लीटर उत्पादन क्षमता की फैक्ट्री स्थापित करने पर ख़र्च लगभग एक से डेढ़ करोड रुपए आता है.

इसीका नतीजा है कि बड़ी संख्या में भारतीय और विदेशी उद्यमी इस व्यवसाय में कूद रहे हैं.