बुधवार, 01 अगस्त, 2007 को 08:11 GMT तक के समाचार
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में वैश्विक मंदी के बीच शेयरों की बिकवाली के कारण सेंसेक्स 615 अंक लुढ़क कर 15000 के स्तर से भी नीचे बंद हुआ है.
11 जुलाई के बाद पहली बार सेंसेक्स 15000 के नीचे आया है.
27 जुलाई को दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में मंदी के रुख़ से बीएसई के सूचकांक में 541 अंकों की गिरावट आई थी.
बाज़ार में गिरावट की वजह अमरीका और एशिया के शेयर बाज़ारों में गिरावट मानी जा रही है.
कमज़ोर शुरुआत
बाज़ार में कारोबार की शुरुआत से ही गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया था.
कारोबार शुरू होने के आधे घंटे में ही सेंसेक्स में 475 अंकों की गिरावट आ गई.
दोपहर बाद इसमें कुछ सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद लुढ़कने का जो सिलसिला चला वह कारोबार ख़त्म होने तक नहीं थमा.
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक 14910 अंक तक गिरने के बाद कुछ संभला और कारोबार की समाप्ति पर 14935 अंक पर बंद हुआ.
सेंसेक्स दिन में 15344 अंक तक चढ़ा था.
सेंसेक्स मंगलवार को कारोबार खत्म होने पर 290 अंकों की बढ़त के साथ 15550 अंक पर बंद हुआ था.
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ़्टी भी खुद को मंदी की मार से नहीं बचा सका और 183 अंक लुढ़ककर 4345 अंक पर बंद हुआ.
निफ़्टी मंगलवार को कारोबार की समाप्ति पर 4528 अंक पर बंद हुआ था.
रिज़र्व बैक ने मंगलवार को ही मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा की थी और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी.
रिज़र्व बैंक ने धन आपूर्ति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए अन्य मानक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था.
शेयर बाज़ार वित्त मंत्री पी चिदंबरम के उद्योग जगत को करों में छूट के संकेत के बावजूद संभलव नहीं सका.